लंबे समय से ओटीटी का हिस्सा रही हरलीन से जब कंटेंट और सेंसरशिप को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहानी कहने की आजादी के साथ बच्चों के डिजिटल एक्सपोजर पर भी बात की।
फिल्ममेकर को अपनी कहानी कहने का हक
अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में हरलीन से पूछा गया कि ओटीटी पर कितना कंटेंट दिखाया जाए और कितना नहीं, इसे लेकर लगातार बहस होती है। इस पर उन्होंने कहा, ‘मैं फ्रीडम ऑफ स्पीच में विश्वास करती हूं। मुझे लगता है कि हर फिल्ममेकर को अपनी कहानी कहने का हक है। वह जो फिल्म बनाना चाहता है, जो कहानी बताना चाहता है, उसे बनाने का अधिकार उसके पास होना चाहिए। आखिर में यह दर्शकों पर है कि उन्हें क्या देखना है और क्या नहीं देखना है। मेरा मानना है कि आज सिर्फ फिल्मों और सीरीज की बात नहीं है। बच्चों के पास पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा डिजिटल एक्सपोजर है।'
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
बच्चों के लिए पैरेंटल गाइडेंस बहुत जरूरी
अभिनेत्री ने आगे कहा, ‘बच्चों के लिए पैरेंटल गाइडेंस बहुत जरूरी है। एक्सपोजर बहुत ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ फिल्में ही हैं। इतना सारा कंटेंट इंटरनेट पर है। टेक्नोलॉजी इतनी आगे आ गई है कि आप बच्चों को हर चीज से दूर नहीं रख सकते। पहले बच्चे एक अलग तरह के माहौल में बड़े होते थे। परिवार के लोग उन्हें बताते थे कि क्या सही है और क्या गलत। अब बच्चों के पास आईपैड हैं, फोन हैं। स्कूल भी आईपैड देते हैं। हां, ये भी सच है कि आज के समय में हर चीज पर नजर रखना पैरेंट्स के लिए भी मुश्किल है।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
हर चीज के लिए पैरेंट्स को जिम्मेदार नहीं
हरलीन के मुताबिक, बच्चों तक पहुंचने वाले कंटेंट को सिर्फ फिल्मों के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। वह कहती हैं, ‘आज एक्सपोजर का लेवल बहुत अलग है। फोन बच्चों को उनकी सिक्योरिटी के लिए भी दिए जाते हैं। जमाना बदल गया है। ऐसे में आप कैसे कह सकते हैं कि यह सिर्फ मां-बाप की परवरिश की वजह से हो रहा है? क्योंकि आज बहुत कुछ है, जो बच्चों के आसपास है।’