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Exclusive: ‘शाहरुख रोमांस के बाप हैं’, फरहाद सामजी ने बताया कैसे देते थे नरेशन? रोहित शेट्टी पर किया खुलासा

सार

Farhad Samji: स्क्रिप्ट राइटर फरहाद सामजी ने शाहरुख खान और रोहित शेट्टी को लेकर कई खुलासे किए। जानिए उन्होंने ‘सिंघम’ और ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ से जुड़े क्या किस्से सुनाए…
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फरहाद सामजी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्क्रिप्ट राइटर और निर्देशक फरहाद सामजी अपने करियर में कई बड़े-बड़े स्टार्स के साथ काम कर चुके हैं। अमर उजाला से बातचीत में फरहाद सामजी ने शाहरुख खान से लेकर रोहित शेट्टी तक के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया।

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निर्देशक ने याद किया कि कैसे 'चेन्नई एक्सप्रेस' के वक्त उन्हें कई बार शाहरुख के सामने हर किरदार बनकर पूरा सीन करके दिखाना पड़ता था। इतना ही नहीं एक बार 'सिंघम' के सेट पर सबकुछ तैयार होने के बावजूद रोहित शेट्टी ने कैमरा चालू होने से ठीक पहले तीन घंटे तक शूटिंग ही रुकवा दी थी। फरहाद ने फिल्मों के पीछे छिपे कई ऐसे किस्से सुनाए, जो शायद ऑडियंस तक कभी पहुंच ही नहीं पाते।

‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में शाहरुख के लिए थोड़ा अलग जोन था
बड़े सितारों के साथ काम करने की बात आई तो फरहाद सामजी सीधे ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के दिनों में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि देखो जैसे मैंने चेन्नई एक्सप्रेस लिखी थी। उस तरह की कॉमेडी करना, उस तरह का टोन पकड़ना, शाहरुख खान साहब के लिए भी थोड़ा अलग जोन था।

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मैं सिर्फ सीन नहीं पढ़ता था, सबकी आवाजें निकालता था, हर कैरेक्टर बन जाता था। मैं बाकायदा नरेशन करता हूं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ सीन पढ़ देता हूं। मैं सबकी आवाजें भी निकालता हूं। मैं हर कैरेक्टर बन जाता हूं। मैं एक्टिंग करके सीन सुनाता हूं, ताकि सामने वाला सिर्फ सुन न रहा हो, वो पूरा सीन देख भी रहा हो।

फिर उसी अनुभव को याद करते हुए निर्देशक ने कहा कि फिल्म में एक अंताक्षरी का सीन था, जिसमें एक-दूसरे को अपनी बातें कहने का ढंग था। अब इस सीन के लिए शाहरुख मुझ पर पूरा भरोसा करते।

मैंने जैसे इनैक्ट किया, उन्होंने वैसे ही किया। अब जाहिर है कि शाहरुख भी समझते थे कि अगर फरहाद इस तरह कर रहा है तो जरूर कोई वजह है। कोई कॉमिक दुनिया है, जो वो बना रहा है।

चेन्नई एक्सप्रेस - फोटो : इंस्टाग्राम

रोमांस में तो शाहरुख खान बाप हैं
फरहाद सामजी ने आगे कहा कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें शाहरुख जैसे एक्टर को समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। अब रोमांस मुझे उनको क्या सिखाना। उसमें तो शाहरुख खान बाप हैं, उनको कोई नहीं सिखा सकता।

लेकिन हां, इस तरह की कॉमेडी का एक अलग टोन होता है, अलग रिदम होती है। वहां नरेशन से बहुत चीजें साफ हो जाती हैं कि ये सीन किस तरह खेला जाएगा। इसीलिए मैं भले ही फिल्म का लेखक होता हूं, लेकिन मेरी जरूरत सेट पर ज्यादा होती है।

सिंघम की शूटिंग के दौरान अजय देवगन और रोहित शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया

‘सिंघम’ के सेट पर रोहित शेट्टी ने तीन घंटे शूटिंग रुकवा दी थी
बातचीत के दौरान फरहाद ने 'सिंघम' का किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि ‘सिंघम’ की शूटिंग का पहला दिन था। पहला ही दिन क्लाइमेक्स सीन था। वह सीन था जहां प्रकाश राज अजय देवगन से कहते हैं, ‘चीटिंग करता है तू चीटिंग करता है।’

अब आप समझो बेचारे एक्टर्स लोग कौन कहां से आया है। कोई फ्लाइट पकड़कर आया है। कोई सीधा वैनिटी से सेट पर आया है। लेकिन उनको ये कैसे समझ आएगा कि ढाई घंटे की फिल्म में अभी तक क्या हुआ है। क्लाइमेक्स में उनका भाव क्या होना चाहिए।

यहीं पर निर्देशक रोहित शेट्टी ने पूरा शूट रुकवा दिया। फरहाद ने बताया कि रोहित शेट्टी ने शूट शुरू करने से पहले पूरा शेड्यूल रोक दिया। उन्होंने कहा कि पहले नरेशन होगा। पूरी यूनिट को बैठाया गया। करीब तीन घंटे तक मेरा नरेशन रखा गया।

मैंने पूरी फिल्म शुरू से आखिर तक सुनाई, ताकि सबको समझ आए कि क्लाइमेक्स तक पहुंचने से पहले कहानी में क्या-क्या हुआ है। सबने कहानी सुनी। सबने उस पूरी जर्नी को फील किया। उसके बाद जाकर हमने वो सीन स्टार्ट किया।

फरहाद सामजी - फोटो : सोशल मीडिया

कई सीन कागज पर समझ में नहीं आते
फरहाद ने 'वेलकम टू द जंगल' का एक मजेदार सीन भी साझा किया। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में एक फोन वाला सीन है। चार लोग फोन पर लगे हुए हैं। अब वो कागज पर नहीं आ सकता।

मान लो सुनील शेट्टी परेश रावल को बोल रहे हैं - ‘तू सामने है, नहीं तो मैं तेरे को…। फोन पर बोल रहा है। फिर कह रहा है सामने होता तो मार देता। सामने से जवाब आता है... अरे सामने ही तो खड़ा है।

अब ये सीन सब कागज पर उतना मजेदार नहीं लगेगा। लेकिन जब आप उसको इन-एक्ट करके दिखाओगे, तभी समझ आएगा कि सीन में कॉमेडी कहां पैदा हो रही है। कई चीजें ऐसी होती हैं जो कागज पर उतनी असरदार लगती ही नहीं हैं। वो तभी समझ आती हैं जब आप करके दिखाते हो।

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फरहाद सामजी - फोटो : सोशल मीडिया
बेहतर सुझाव मानता हूं और बदलाव करता हूं
फरहाद मानते हैं कि बड़े कलाकारों के साथ काम करते हुए लेखक को भी लचीला होना पड़ता है। कुछ राइटर बहुत रिजिड हो जाते हैं। उनको लगता है कि मैंने इतनी मेहनत से लिखा है, तो कोई इसे कैसे बदल सकता है।

लेकिन मुझे हमेशा लगता है कि अगर किसी के सुझाव से चीज बेहतर हो रही है, तो बदलाव करने में कोई दिक्कत नहीं है। हां, अगर उससे सीन खराब हो रहा है, तो मैं वहां अड़ जाता हूं। इतने साल में इतना भरोसा एक्टर्स के बीच कमा लिया है कि अगर मैं बोल रहा हूं ये पंच नहीं चलेगा, तो लोग सुनते हैं। आखिरकार हम सब बहुत प्यार-मोहब्बत से इस पर काम करते हैं।
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