फिल्म 'एक दीवाने की दीवानियत' में हर्षवर्धन राणे एक जुनूनी प्रेमी बने हैं। सोनम का रोल भी एकदम हटकर है। 21 अक्तूबर को रिलीज हुई यह फिल्म फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार कलेक्शन कर रही है। फिल्म और अपने किरदार को लेकर सोनम और हर्षवर्धन ने कई दिलचस्प बातें साझा कीं। वहीं, निर्माता अंशुल गर्ग ने फिल्म की कहानी को लेकर रोचक खुलासा किया।
सोनम बाजवा, हर्षवर्धन राणे, अंशुल गर्ग
- फोटो : अमर उजाला
आपको हर्षवर्धन के साथ मूवी करके कैसा लगा?
सोनम बाजवा: 'बहुत अच्छा लगा। बहुत कुछ सीखने को मिला मुझे। जब भी आपको इतने अच्छे एक्टर के साथ काम करने का मौका मिलता है, तो शानदार अनुभव रहता है। मैं बहुत ब्लेस्ड हूं। वह अपने काम को लेकर बहुत गंभीर हैं। ऐसे लोगों के साथ आप जब काम करते हैं तो आपकी फिल्म भी अच्छी बनती है और आपको काम करके भी मजा आता है। मेरा एक्सपीरियंस अच्छा रहा'।
आपने इस फिल्म में इतना चैलेंजिंग रोल अदा किया है। कितना मुश्किल लगा?
सोनम बाजवा: 'मुश्किल से ज्यादा मैंने बहुत एंजॉय किया। एंजॉय इसलिए, क्योंकि मेरे पास ऐसा मौका आया, जिसका मैं इंतजार लंबे वक्त से कर रही थी। मुझे अभी भी लगता है कि जितना इमोशनल रोल मैं कर सकती हूं बतौर कलाकार, वह मौका अब भी नहीं मिला। मगर, जितना भी मौका मिला, मैंने किया। मुझे बहुत मजा आया। मुझे चैलेंजिंग रोल करके मजा आता है'।
क्या आपको सोनम कहीं अपरिपक्व लगीं?
अंशुल गर्ग: 'मैं जितनी उम्मीद कर रहा था, उससे बहुत अच्छा परफॉर्म किया सोनम ने। मुझे लगता है कि इस मूवी से सोनम को लेकर जो परसेप्शन है एक पंजाबी फिल्म स्टार होने की, वह बदलने वाली है। उन्होंने फिल्म में बिना पंजाबी लहजे के बहुत स्पष्ट हिंदी बोली है। उन्होंने प्रॉपर दिल्ली-यूपी वाली टोन में हिंदी बोली है। बहुत अच्छा परफॉर्म किया है'।
सोनम बाजवा, हर्षवर्धन राणे, अंशुल गर्ग
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आप बहुत अच्छे से हिंदी बोल लेती हैं, क्योंकि फिल्म में बोली है। तो क्या शुरू से इतनी अच्छी हिंदी रही है?
सोनम बाजवा: मेरा जन्म उत्तराखंड में हुआ है। मेरी परवरिश यूपी में हुई है। मैं एक सिख परिवार में पली-बढ़ी हूं तो मुझे पंजाबी भी लिखनी, पढ़नी बोलनी सब आती है। हिंदी मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं कि मेरी बहुत अच्छी है कि क्या है? मैं रोजमर्रा में हिंदी में बात करती हूं। ये मुझे लेकर परसेप्शन है कि मैं पंजाबी फिल्मों में काम करती हूं तो मेरी हिंदी ठीक नहीं है'।
एक दीवाने की दीवानियत
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आप इतना सीरियस क्यों दिखते हैं? आपके बारे में कहा जाता है कि हर्षवर्धन सेट पर बहुत सीरियस रहते हैं। जल्दी से घुलते-मिलते नहीं। क्या वाकई ऐसा है?
हर्षवर्धन राणे: 'हां शायद मुझे बचपन से घुलने-मिलने वाली लाइफ मिली नहीं। मैंने कभी खोजी नहीं। एक पार्ट मिस तो हुआ है, जहां अपने आप को छोड़ देते हो किसी के सामने। शिकायत कर देते हो। काफी वक्त मैंने खुद से ही एक्सप्रेस किया। खुद से ही बताया। खुद ही समझा। कई वर्षों तक मेरी खुद से ही बातचीत हुई, शायद इस वजह से ऐसा है'।
आप बहुत कम नजर आते हैं फिल्मों में। इसकी क्या वजह है? हर्षवर्धन को दर्शक बहुत कम क्यों देखते हैं?
हर्षवर्धन राणे: 'जवाब उन लोगों के पास ही है कि इस साल से पहले उन्होंने टिकट नहीं खरीदे थे। इस साल उन्होंने टिकट खरीद लिए। टिकट बिकती हैं, तो चीजें खुलती हैं'।
सोनम बाजवा और हर्षवर्धन राणे
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आउटसाइडर होने के नाते कैसा लगता है बॉलीवुड में काम करना?
हर्षवर्धन राणे: 'मैं यह शब्द खत्म कर देना चाहता हूं। आउटसाइडर और नेपोटिज्म। मुझे लगता है कि यह बहानेबाजी है। काम न करने की, आलस की। यह प्यारी सी इंडस्ट्री है, इसका भूत है नेपोटिज्म, जो बना दिया गया। मैं चाहता हूं कि लोग इस जंगल में आएं, एंजॉय करें। मैं खुद पर्सनल लाइफ में जंगल का बहुत बड़ा दीवाना हूं। मैं चाहता हूं कि लोग इस इंडस्ट्री में आएं बाहर से। उनके अंदर से डर निकल जाए'।
इस फिल्म की कहानी बहुत अलग है। आपने जब पहली बार यह स्क्रिप्ट पढ़ी तो आपने क्या सोचा था फिल्म के बारे में?
अंशुल गर्ग: मैंने स्क्रिप्ट बाद में पढ़ी, पहले मैंने नेरेशन पढ़ी। मिलाप जावेरी से आप उनकी किसी भी फिल्म का नेरेशन लेते हैं, तो वह इतनी एनर्जी डाल देते हैं। जब मैंने इस फिल्म की नैरेशन सुनी तो मैंने तुरंत कह दिया था कि हम यह फिल्म कर रहे हैं। मुझे पता था कि दर्शक इसे पसंद करेंगे। काफी मसाला है। अच्छा म्यूजिक बनाया। अब बॉक्स ऑफिस पर नंबर बोल रहे हैं।'
एक दीवाने की दीवानियत
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फिल्म के गाने जबर्दस्त हैं। गानों का सलेक्शन किस तरह करते हैं?
अंशुल गर्ग: 'मैंने इस फिल्म में मेरी जितनी जानकारी थी सब निचोड़कर डाल दी। हमारी फिल्म के पांच गाने ब्लॉकबस्टर हो चुके हैं। यह बात मैंने हर्ष को पहले ही बोल दी थी कि चार गाने पहले ही हिट होंगे'।