राकेश बेदी फिल्म 'धुरंधर 2' के दौरान
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राकेश बेदी ने हमारे लिए भी रास्ता खोला
देवेन भोजानी कहते हैं, 'राकेश बेदी का उदाहरण बहुत अच्छा है। लंबे समय तक उन्हें कॉमेडी में ही देखा गया। ‘धुरंधर’ उनके लिए गेम चेंजर रही है। लोगों ने उनके काम को जिस तरह सराहा, वो बहुत जरूरी था। मैं आदित्य धर और मुकेश छाबड़ा को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने ऐसा रिस्क लिया।
मैंने मुकेश छाबड़ा को मैसेज करके कहा कि राकेश बेदी और गौरव गेरा जैसे कलाकारों को, जो कई साल से कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं, उन्हें इस तरह के किरदार में कास्ट करना वाकई बड़ी बात है।
इससे मेरे जैसे एक्टर्स के लिए उम्मीद बढ़ती है कि शायद हमें भी हिंदी सिनेमा में अलग नजरिए से देखा जाए। हमें टेस्ट किया जाए या हमें ऐसे मौके मिलें। जैसे मुझे ‘धबकारो’ में मौका मिला, वैसे ही हमें अलग-अलग तरह के किरदार करने के मौके मिलते रहें, ताकि हम अपने अंदर के अलग-अलग पहलुओं को सामने ला सकें।’
कॉमेडी मेरी ताकत भी बनी और मेरी सीमा भी
देवेन मानते हैं कि कॉमेडी ने उन्हें पहचान दी, लेकिन उसी ने उन्हें एक दायरे में भी सीमित कर दिया। वह कहते हैं, ‘मैंने कॉमेडी बहुत की है और मुझे उस पर गर्व है, क्योंकि कॉमेडी करना सबसे मुश्किल होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मुझे उसी में सीमित कर दिया गया। लोगों ने मान लिया कि मैं सिर्फ यही कर सकता हूं, जबकि मेरे अंदर और भी बहुत कुछ है।’