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Deepak Tijori: 'मेरी आवाज अब जाकर सुनी गई', नॉमिनेशन मिलने पर खुश दीपक तिजोरी; सलमान-शाहरुख को लेकर कही ये बात

सार

Deepak Tijori Exclusive Interview: अभिनेता दीपक तिजोरी को हाल ही में शॉर्ट फिल्म 'ईकोज ऑफ अस' के लिए इंटरनेशनल नॉमिनेशन मिला है। 35 साल बाद ऐसा हुआ है। उन्हें बेस्ट एक्टर के लिए यह नामांकन मिला है। हाल ही में अमर उजाला के साथ बातचीत में उन्होंने इस पर अपने विचार रखे।
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दीपक तिजोरी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दीपक तिजोरी पिछले 35 वर्षों से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। ‘आशिकी’ से लेकर ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसे यादगार किरदारों तक उन्होंने हर रोल को पूरी सच्चाई से जिया। अमर उजाला डिजिटल से बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर बताया कि कैसे वर्षों तक बेहतरीन काम करने के बावजूद उन्हें अवॉर्ड्स से दूर रखा गया। अवॉर्ड शोज की सच्चाई, सिस्टम की खामियों पर बात की। हाल ही में शॉर्ट फिल्म ‘Echoes of Us’ (ईकोज ऑफ अस) के लिए मिले इंटरनेशनल नॉमिनेशन पर उन्होंने खुलकर बातचीत की। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

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दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
वर्षों तक बेहतरीन काम किया, फिर भी न कोई नॉमिनेशन, न अवॉर्ड, क्या तकलीफ होती थी?
हां, होती थी। हर साल जब अवॉर्ड्स की लिस्ट आती थी, मन में उम्मीद होती थी कि शायद इस बार मेरा नाम हो। ‘आशिकी’, ‘सड़क’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खिलाड़ी’... इतने अलग-अलग किरदार निभाए, फिर भी हर बार नाम नहीं आया। धीरे-धीरे मन शांत होता गया। कभी इशारा किया, कभी इंतजार किया, लेकिन एक समय पर खुद से कहा, 'अब उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। दुख नहीं था, लेकिन खालीपन जरूर था। शिकायत नहीं, पर मन में एक अधूरी-सी ख्वाहिश हमेशा रही'।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
अब जब 'ईकोज ऑफ अस' के लिए LA में बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन मिला तो कैसा लगा?
ये नॉमिनेशन सिर्फ एक अवॉर्ड की बात नहीं थी, ये एक लंबे इंतजार का जवाब था। ‘ईकोज ऑफ अस’ वो फिल्म थी, जिसे मैंने खुद के लिए लिखा और जिया। शूटिंग के दौरान कभी मॉनिटर नहीं देखा। डर था कि पता नहीं लोग क्या कहेंगे। लेकिन जब फिल्म पूरी देखी, तो लगा, 'हां, यही मेरा सच है'। जब भाई ने फोन करके नॉमिनेशन की खबर दी, तो मैंने कहा, ' सच में'? विश्वास नहीं हुआ। लेकिन शायद हर चीज का समय होता है। अब लगता है कि ये नॉमिनेशन मेरे करियर की एक आवाज है, जो अब जाकर सुनी गई है।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
अवॉर्ड जूरी को लेकर हमेशा विवाद रहा है। क्या आपको लगता है सिस्टम सही नहीं है?
कई बार ऐसा लगता है कि फैसले लेने वाले लोगों को न एक्टिंग की समझ है, न सिनेमा की। ऐसे लोग तय कर रहे होते हैं कि किसे अवॉर्ड मिलना चाहिए और किसे नहीं। ये एक गंभीर बात है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
जब आपको जूरी में शामिल होने का ऑफर मिला, आपने क्या किया?
मना कर दिया। कई बार बुलाया गया, लेकिन मुझे पता था कि उस टेबल पर कौन-कौन बैठे होंगे। अगर किसी अच्छे काम को वहां अनदेखा किया जाता और मेरा नाम उस जूरी में जुड़ा होता, तो मुझे बुरा लगता। इसलिए मैंने खुद को उस सिस्टम का हिस्सा नहीं बनने दिया।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
क्या ये सिर्फ अवॉर्ड्स तक सीमित है?
नहीं। ये सोच हर जगह फैली है। FTII जैसे आर्गेनाईजेशन में भी ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दे दी जाती है, जिनका इंडस्ट्री से कोई सीधा संबंध नहीं होता। सेंसर बोर्ड्स में भी वही हाल है। ये जो सिस्टम है, जहां टैलेंट से ज्यादा नेटवर्किंग मायने रखती है, वही सिनेमा के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

दीपक तिजोरी - फोटो : सोशल मीडिया
आप खुद को इस सबके बीच कैसे बैलेंस रखते हैं?
मैं अब किसी को बदलने की कोशिश नहीं करता। मैंने तय किया है कि मैं बस अपना काम ईमानदारी से करता रहूं। कोई माने या न माने, अब मुझे फर्क नहीं पड़ता।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
अवॉर्ड शोज से दूरी कब बनी?
‘जो जीता वही सिकंदर’ के समय मैंने अवॉर्ड फंक्शन में परफॉर्म भी किया था। एक शो में उसी फिल्म के गाने पर डांस किया। लेकिन उसी रात जब आमिर का नाम नॉमिनेट होने के बाद भी अवॉर्ड किसी और को मिला, तो लगा कि फैसले टैलेंट पर नहीं होते। उसी दिन से मैंने अवॉर्ड शोज में हिस्सा लेना बंद कर दिया। आमिर ने भी खुद को इन सबसे अलग कर लिया था।

दीपक तिजोरी - फोटो : सोशल मीडिया
क्या वो रात एक टर्निंग पॉइंट थी?
हां, उसी रात के बाद सब कुछ साफ हो गया। मैं नहीं कहता कि हर बार गलत होता है, लेकिन जब सिस्टम पर भरोसा न हो, तो दूरी रखना बेहतर होता है।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
क्या कभी इंडस्ट्री में पीछे छूटने का अफसोस हुआ?
नहीं, कभी नहीं। मेरे लिए हमेशा मेहनत ही सबसे अहम रही है। मैंने कभी किसी से तुलना नहीं की। न जलन की, न खुद को कम समझा। जिस माहौल से आया हूं, उसने बैलेंस सिखाया है।

दीपक तिजोरी-सलमान खान - फोटो : इंस्टाग्राम
आज भी शाहरुख-सलमान जैसे सितारों से संबंध कैसे हैं?
जैसे पहले थे। सच्चे और बिना बनावट के। सलमान के साथ सिर्फ एक फिल्म की थी, लेकिन जब हाल ही में मेरा नाम एक स्क्रिप्ट के लिए आया, तो उन्होंने कहा, 'वह बहुत ही कमाल का एक्टर है, आपको यह फिल्म करनी चाहिए'। ऐसे पल रिश्तों की गहराई दिखाते हैं।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
जब OTT पर सब एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं, तो आप अब तक क्यों नहीं दिखे?
क्योंकि मैं वही काम करना चाहता हूं, जो मेरे दिल से जुड़ा हो। आज बहुत कुछ बन रहा है, लेकिन मुझे वो कहानी चाहिए, जो मुझे भीतर से हिला दे। जब ऐसी स्क्रिप्ट मिलेगी, तब मैं जरूर स्क्रीन पर लौटूंगा।

दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
क्या डायरेक्टर के तौर पर आपको कभी सही पहचान नहीं मिली?
नहीं मिली। मैंने जो फिल्में बनाईं, उन्हें लोगों ने देखा ही नहीं। अगर कोई देखकर कहता कि फिल्म कमजोर है, तो मैं मान लेता। लेकिन बिना देखे राय बना लेना ठीक नहीं है। अफसोस सिर्फ इतना है कि शायद लोगों को मौका ही नहीं मिला।
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दीपक तिजोरी - फोटो : इंस्टाग्राम
क्या आज कंटेंट से ज्यादा मार्केटिंग मायने रखती है?
हां, आज प्रचार बहुत बड़ा रोल निभाता है। कई फिल्में सिर्फ इसलिए चल जाती हैं, क्योंकि उनका पीआर अच्छा होता है। मेरी फिल्में शायद उस सिस्टम का हिस्सा नहीं रहीं। लेकिन मुझे कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि मैंने वही फिल्में बनाई हैं, जिन्हें मैं अपने बच्चों के साथ बैठकर देख सकता हूं।


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