पूजा रूपारेल, शाहरुख खान
- फोटो : सोशल मीडिया
'फेम बढ़ा, लेकिन वो वैसे ही रहे'
वो बताती हैं, ' फिल्म 'किंग अंकल' के समय शाहरुख उतने पॉपुलर नहीं थे, लेकिन 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' तक आते-आते वो बहुत बड़े स्टार बन चुके थे। हां, वो अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहने लगे थे, लेकिन उनकी सादगी और अपनापन वैसा ही रहा। वो पहले की तरह हर किसी से बराबरी से बात करते थे। सेट पर कोई भी हो, उनके लिए सब एक जैसे थे। स्टार बनने के बाद भी उनमें कभी घमंड नहीं आया।' पूजा आगे कहती हैं, 'इतने वर्षों में उनमें कोई बदलाव नहीं आया। वो पहले भी मल्टी टास्कर थे और आज भी हैं। एक्टिंग, बिजनेस और परिवार, तीनों को वो जिस तरह संभालते हैं, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है'।
पूजा रूपारेल, शाहरुख खान
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'वो सिखाते नहीं, महसूस कराते हैं'
पूजा को याद है कि 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के सेट पर शाहरुख ने एक सीन के दौरान उन्हें एक छोटी-सी बात कही थी, जो आज तक उनके साथ है। 'उनका बैकग्राउंड थिएटर से था और वो एक्टिंग की बारीकियों को गहराई से समझते थे। सेट पर जब भी कोई सुधार की जरूरत होती, वो सबसे पहले आगे आते। उन्होंने मुझसे कहा था, बॉडी रिलैक्स रखो लेकिन इमोशन भीतर रखो। उस एक लाइन ने मुझे बहुत कुछ सिखाया।' वो आगे कहती हैं, 'शाहरुख एक्टिंग को किसी तकनीक की तरह नहीं, बल्कि एक एहसास की तरह जीते थे। वैसे, बता दूं कि वो बहुत कम रीटेक लेते थे। उनका काम किसी प्रेरणा से कम नहीं था।'
'वो दिन जब थिएटर और सिनेमा मिल गए थे'
पूजा को आज भी याद है 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के प्री-क्लाइमैक्स सीन की रिहर्सल का दिन। 'उस दिन पूरा सेट बंद था। सिर्फ हम कलाकार और कैमरा टीम मौजूद थे। अगले दिन सीन को एक ही टेक में शूट करना था, इसलिए हमने पूरी तैयारी की। ऐसा लग रहा था जैसे हम कोई नाटक रिहर्सल कर रहे हों,' पूजा बताती हैं। वो आगे कहती हैं, 'मुझे लगा जैसे थिएटर और सिनेमा उस दिन एक साथ सांस ले रहे हों। शाहरुख का थिएटर वाला अनुभव उस दिन साफ झलक रहा था। वो सीन को जी रहे थे और हर पल में डूबे हुए थे। उनकी एकाग्रता देखकर लगा जैसे वो किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। तब समझ आया कि वो इतने बड़े स्टार क्यों बने। क्योंकि वो हर सीन में अपना पूरा दिल लगा देते हैं। उस दिन ऐसा लग रहा था जैसे उनका कोई एग्जाम हो।'
'वो भीतर से बहुत शांत इंसान हैं'
पूजा बताती हैं, 'कुछ साल पहले मैं एक इवेंट में उनसे मिली थी। वो बहुत शांत थे, लेकिन उनकी आंखों में वही चमक थी। उन्होंने किसी से कहा था कि वो हर दिन मन ही मन थैंक यू कहते हैं भगवान को, जिंदगी को और हर उस मौके को जो उन्हें मिला।' वो आगे कहती हैं, 'शाहरुख ने कहा था कि जब इंसान शुक्रिया कहना सीख लेता है, तो जिंदगी बहुत खूबसूरत हो जाती है। उनकी ये बात मेरे दिल में बस गई। असल जिंदगी में भी वो बेहद विचारशील और प्यार से भरे इंसान हैं। उनका स्वभाव ऐसा है कि वो हर किसी का दिल जीत लेते हैं।'
'शाहरुख हमेशा वही करें जो उनका दिल चाहे'
पूजा अपनी दुआओं में कहती हैं, 'मैंने हमेशा कहा है कि सबसे अच्छी दुआ यही है कि इंसान वही करे जो उसका दिल चाहे। और कभी वो न करे जो वो नहीं करना चाहता। मैं यही चाहती हूं कि शाहरुख हमेशा अपने दिल की सुनें, वही करें जो उन्हें सच्ची खुशी दे।' वो आगे कहती हैं, 'वो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जिएं, जैसे हमेशा जीते आए हैं। जितना बड़ा उनका दिल है, उतनी ही बड़ी उनकी खुशी बनी रहे। उन्हें और उनके परिवार को ढेर सारा प्यार और दुआएं।'