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Film Ajey: हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को दिए नए निर्देश, योगी आदित्यनाथ की बायोपिक से जुड़ा है मामला

Thu, 07 Aug 2025 09:08 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट सेंसर बोर्ड को फिल्म ‘अजेय- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी’ को लेकर नए निर्देश दिए हैं। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया था। इसके पीछे जो कारण सेंसर बोर्ड ने दिए, उससे हाई कोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया। 

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फिल्म 'अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी' - फोटो : एक्स (ट्विटर)
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विस्तार
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गुरुवार को फिल्म ‘अजेय’ से जुड़ा मामला चर्चा में रहा, यह फिल्म उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ की बायोपिक है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड से कुछ सवाल पूछे। जिसमें यह सवाल भी शामिल रहा कि एक फिल्म को मंजूरी देने के लिए किसी अथॉरिटी से एनओसी यानी नॉन ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लाने पर जोर क्यों दिया जा रहा है। 

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एनओसी न मिलने पर सेंसर ने खारिज की याचिका 
पीटीआई के अनुसार जज रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले को केस की सुनवाई के दौरान बताया गया ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी’ के मेकर्स ने फिल्म सर्टिफिकेट के लिए याचिका डाली थी, जिसे सेंसर बोर्ड ने (CBFC) ने खारिज कर दिया। फिल्म ‘अजेय’ योगी आदित्यनाथ की जिंदगी पर लिखी गई एक किताब पर आधारित है।
फिल्म मेकर्स के वकील असीम नफड़े, सत्या आनंद और निखिल अराधे ने कहा कि फिल्म सर्टिफिकेट की याचिका को इसलिए खारिज किया गया, क्योंकि उनके पास मुख्यमंत्री योगी के अधिकारी (सीएमओ) का एनओसी नहीं है। वहीं सेंसर बोर्ड ने अपने फैसले में कहा कि फिल्म में कुछ सीन्स, डायलॉग ऐसे हैं जिन्हें हटाने या उनमें बदलाव करने की जरूरत है। इसके जवाब में फिल्म ‘अजेय’ के मेकर्स का कहना है कि अगर सेंसर साफ तौर पर बताए कि कौन से सीन्स, डायलॉग आपत्तिजनक हैं, जो उनमें बदलाव किया जाएगा।’  
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सेंसर बोर्ड के वकील ने दिए ये तर्क 
सारे पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने सवाल किया कि सेंसर बोर्ड एक फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए किसी अथॉरिटी के एनओसी पर क्यों जोर दिया जा रहा है। कोर्ट ने सेंसर बोर्ड से कहा कि वह फिल्म के मेकर्स को बताए कि आपत्तिजनक सीन्स, डायलॉग क्या हैं? जिससे फिल्म में बदलाव किया जा सके।
इस पर सेंसर बोर्ड की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभय खांडेपारकर ने कहा कि फिल्म देखने के बाद सेंसर सर्टिफिकेट का आवेदन खारिज कर दिया गया था। फिल्म मेकर्स सेंसर बोर्ड की रिव्यू कमिटी के सामने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं।
खांडेपारकर ने तर्क दिया कि यह फिल्म एक बायोपिक थी, जिसका नाम एक अथॉरिटी के नाम पर रखा गया था। फिल्म में भाषण भी वही थे। ऐसे में फिल्म के मेकर्स दावा कैसे कर सकते हैं यह एक काल्पनिक कहानी है। जब कोर्ट ने कहा कि यह फिल्म तो पांच साल पहले पब्लिश एक किताब पर है तो अभय खंडेपारकर ने तर्क दिया कि किताब और फिल्म का असल अलग-अलग होता है।

कोर्ट ने दिए सेंसर को नए निर्देश 
आखिर में हाई कोर्ट ने फिल्म मेकर्स से सेंसर की रिव्यू कमिटी से संपर्क करने को कहा। यह कमिटी 14 अगस्त तक सभी कारणों के साथ फिल्म को लेकर फैसला सुनाएगी। बताते चलें कि फिल्म ‘अजेय’ 1 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी। यह फिल्म 'द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर' नाम की किताब से प्रेरित है। यह किताब कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित है। 

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