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आखिर क्यों शुरू हुआ 'हैदर' फिल्म का विरोध

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निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘हैदर’ को लेकर शुरू हुआ विवाद तेज हो गया है। कुछ लोग जहां फिल्म की तारीफ कर रहे हैं, वहीं इस फिल्म को देश और सेना विरोधी बताने वालों की कमी नहीं है।
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फिल्म में जिस तरह से सेना का चित्रण किया गया है और आतंकवाद की ओर कदम बढ़ाने वालों के प्रति सहानुभूति नजर आती है, उससे अनेक दर्शक आहत हैं। उन्होंने फिल्म का बायकॉट करने की मुहिम छेड़ दी है। सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में विशाल और उनकी फिल्म पर तेज हमले हो रहे हैं। इस बीच विशाल चुप्पी साधे हैं। फिल्म गुरुवार को रिलीज हुई थी और सप्ताहांत तक 20 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा चुकी है।

विशाल की फिल्म के विरुद्ध ट्विटर पर ‘हैशटैग बायकॉटहैदर’ और ‘हैशटैग हैदरट्रूसिनेमा’ नाम से दो धड़े बने हैं। हैदर का समर्थन करने वाले इसे मानवीय संवेदनाओं की कहानी बता रहे हैं। जबकि बायकॉट करने वाले इसे देशद्रोह तक करार दे रहे हैं। ट्विटर पर पहले फिल्म का बायकॉट करने की मुहिम शुरू हुई थी, तब विशाल के समर्थक भी मैदान में उतरे।
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क्या विशाल ने सिर्फ एक पक्ष दिखाया?

विशाल ने यह फिल्म 1995 के कश्मीर को लेकर बनाई है, जब वहां आतंकवाद की समस्या आज के मुकाबले कई गुना ज्यादा थी। फिल्म में कश्मीर को लेकर भारत-पाक की राजनीति को नहीं छुआ गया है, बल्कि भारतीय सेना को लेकर ऐसे संवाद और दृश्य रचे गए हैं जो उसे ‘खलनायक’ की तरह पेश करते हैं।

विरोधियों की नाराजगी की मुख्य वजह यही है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्यों विशाल ने कश्मीरी पंडितों के प्रति कोई सहानुभूति फिल्म में नहीं दिखाई, जबकि उन पर बहुत अत्याचार हुए, उन्हें अन्याय, अपमान सहना पड़ा।

कई लोगों ने सेंसर बोर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उल्लेखनीय है कि विशाल ने शेक्सपीयर के सबसे चर्चित नाटक हैमलेट की कहानी से प्रेरित होकर हैदर बनाई है। इस बीच ‘अमर उजाला’ ने विशाल से बार-बार संपर्क साधने का प्रयास किया परंतु वे उपलब्ध नहीं हुए।

फिल्म के लेखक भी विवादों में

हैदर को विशाल भारद्वाज ने पत्रकार बशारत पीर के साथ मिल कर लिखा है। पीर कश्मीर के रहने वाले हैं और अलीगढ़ में पढ़े हैं। विशाल ने फिल्म की रिलीज से पहले कहा था कि उन्होंने कश्मीर पर लिखी पीर की किताब पढ़ी थी और उन्हें अपने साथ जोड़ा।

कश्मीर पर पीर की किताब कर्फ्यूड नाइट एक समय चर्चित हुई थी और तब उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरी राष्ट्रीयता विवादास्पद है। उन्होंने खुद को भारतीय बताने से इंकार किया था।

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर पीर पर भी हमले जारी हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी भारत विरोधी भावनाओं को इस फिल्म के माध्यम से न केवल व्यक्त किया, बल्कि विशाल को भी गुमराह किया।
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इन बातों का है विरोध

*फिल्म में अफ्सपा (आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट) का मखौल उड़ाया गया है।
*‘पूरा कश्मीर कैदखाना है मेरे दोस्त’, ‘कश्मीर में ऊपर खुदा है नीचे फौज’ और ‘मरा हुआ मिलिटेंट भी आजकल एक लाख का है’ जैसे संवाद हैं।
*सेना के एक अफसर को कैद कश्मीरी युवकों पर मशीनगन से गोलियां चला कर हत्या करते दिखाया गया है।
*सेना पर कई तीखे व्यंग्य हैं। उसके अफसरों को पूरी तरह से कश्मीरियों के विरुद्ध दिखाया गया है।
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