अंजलि कुल्थे ने दिखाई बहादुरी
अंजलि कुलथे कामा अस्पताल में ड्यूटी पर थीं, तभी खबरें आने लगीं कि सीएसटी पर हमला करने वाले आतंकवादी अस्पताल की ओर बढ़ रहे हैं। एक सामान्य सी शिफ्ट जल्द ही जीवन-मरण की लड़ाई में बदल गई। एनडीटीवी के साथ पिछली बातचीत में अंजलि ने बताया था कि सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी करने के बाद आतंकवादियों को अस्पताल परिसर में घुसते देखने से पहले उन्हें गोलियों की आवाज सुनाई दी थी। जैसे ही इमारत में दहशत फैली, उन्हें तुरंत एहसास हुआ कि उनकी देखरेख में मौजूद मरीजों को सुरक्षा की जरूरत है। भागने के बजाय, उन्होंने वार्ड से 20 प्रेग्नेंट महिलाओं को इकट्ठा किया और उन्हें एक छोटी सी पेंट्री में ले गईं। बत्तियां बुझा दी गईं, मोबाइल फोन बंद कर दिए गए और सभी लोग अंधेरे में चुपचाप बैठे रहे जबकि बाहर हमला जारी था।
ऐसे की मदद
खतरा यहीं खत्म नहीं हुआ। घेराबंदी के दौरान उनमें से एक महिला जो हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित थी और गंभीर रूप से बीमार थी को लेबर पेन शुरू हो गई। अस्पताल के अंदर लगातार गोलीबारी जारी थी और डॉक्टर वार्ड तक सुरक्षित नहीं पहुंच पा रहे थे, ऐसे में अंजलि ने बड़ी सावधानी से मरीज को लेबर रूम तक पहुंचाया।