फिल्मों में मिला जबरदस्त नाम
अविनाश को असली पहचान फिल्म ‘आई मिलन की रात’ से मिली, जो हिट रही। इसके बाद उन्होंने ‘बलमा’, ‘जुनून’, ‘दिल की बाज़ी’, ‘गीत’ और ‘पापी गुड़िया’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। उस दौर में वह इंडस्ट्री के व्यस्त और लोकप्रिय हीरो बन चुके थे।
गलत फैसलों और निजी जिंदगी ने बदला करियर
करियर के पीक पर ही अविनाश की शादी हो गई और वह कम उम्र में पिता भी बन गए। लेकिन उनकी निजी जिंदगी में परेशानियां बढ़ने लगीं, जिसका असर उनके काम पर पड़ा। उन्होंने खुद माना कि उन्होंने अपने पर्सनल प्रॉब्लम्स को करियर पर हावी होने दिया।
इसी दौरान वह भारत छोड़कर विदेश चले गए और लंबे समय तक इंडस्ट्री से दूर रहे। जब तक वह वापस लौटे, तब तक बॉलीवुड काफी बदल चुका था।
हाथ से निकल गईं बड़ी फिल्में
अविनाश ने खुद बताया कि कई बड़ी फिल्में उनके हाथ से निकल गईं।
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‘फूल और कांटे’ पहले उन्हें ऑफर हुई थी, जो बाद में अजय देवगन की डेब्यू फिल्म बनी।
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‘दीवाना’ में भी वह काम कर सकते थे, लेकिन डेट्स की वजह से मना कर दिया, और यह फिल्म शाहरुख खान को मिल गई।
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‘ये दिल्लगी’ भी उनसे छूट गई, जो बाद में सैफ अली खान ने की।
ये वही फिल्में थीं जिन्होंने दूसरे एक्टर्स का करियर चमका दिया।
टीवी और ओटीटी पर नई शुरुआत
फिल्मों में वापसी मुश्किल होने पर अविनाश ने धीरे-धीरे टीवी और रीजनल सिनेमा की ओर रुख किया। शुरुआत में यह बदलाव उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने इसे स्वीकार किया।
आज वह कभी-कभार टीवी, रीजनल फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में नजर आते हैं। हाल ही में वह कुछ डिजिटल प्रोजेक्ट्स में भी दिखे हैं।
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अविनाश वाधवन की कहानी हमें यह सिखाती है कि बॉलीवुड में सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं होता। सही समय, सही फैसले और लगातार मेहनत भी उतनी ही जरूरी होती है। एक छोटा सा ब्रेक या गलत फैसला भी पूरे करियर को बदल सकता है।