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एक हीरो बना फिल्मों का सबसे महंगा विलेन

Tue, 05 Nov 2013 03:39 PM IST
अमर उजाला,मुंबई
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ऐसा कम ही ऐक्टर कर पाते हैं कि अपनी हर अगली भूमिका को पहले निभाई भूमिकाओं से बेहतर साबित करें। लेकिन विवेक ओबेराय ने एक बार फिर साबित किया है कि वह शानदार ऐक्टर हैं और कम से कम खलनायकी में उनका कोई जवाब है।
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यही कारण है कि सुपरहीरो कृष की कहानी ‘कृष 3’ में जितनी तारीफ उन्हें मिल रही है, फिल्म के किसी और पात्र को नहीं।

विवेक की पहली फिल्म ‘कंपनी’ थी, जिसमें उन्होंने चंदू नाम के युवक को रोल निभाया था। इस केरेक्टर के ग्रे शेड्स थे और उस साल विवेक को हर पुरस्कार समारोह में बेस्ट डेब्यू का खिताब मिला था।

फिल्म से साफ हो गया था कि खलनायकी से जुड़े किरदारों में विवेक जमेंगे। यह बात और सच साबित हुई जब ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ में विवेक ने माया डोलस जैसे अंडरवर्ल्ड अपराधी का रोल बखूबी निभाया। ढेर सारी तारीफें बटोरीं। उन्हें इस रोल के लिए ‘बेस्ट विलेन’ के पुरस्कार भी उस साल मिले।
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और अब लग रहा है कि इस साल के सारे बेस्ट विलेन खिताब एक बार फिर से विवेक की झोली में जाने वाले हैं। वैसे खुद विवेक दीवाली पर छुट्टियां मनाने परिवार के साथ निकल गए हैं।

‘शूटआउट...’ के छह साल बाद इतिहास दोहरा रहा है और विवेक ‘कृष-3’ में काल बन कर सब पर भारी पड़ रहे हैं। ट्रेड विशेषज्ञ कोमल नाहटा के अनुसार, ‘विवेक की खलनायकी में विष झरता है।

उन्होंने काल के किरदार में अपना दिल और पूरी ऊर्जा झोंक दी है। इसीलिए कामयाबी उनके कदम चूम रही है। फिल्म में उनकी एंट्री भी जोरदार है और दर्शकों को बहुत मजा आ रहा है।

एक अन्य ट्रेड विशेषज्ञ तरन आदर्श का कहना है, ‘विवेक पूरे फॉर्म में हैं। उन्होंने फिल्मों में खलनायकी को नई ऊंचाई दी है। बॉलीवुड फिल्मों के जाने-पहचाने खलनायकों में उन्होंनें अपनी जगह दर्ज करा ली है।

उल्लेखनीय है कि ‘कृष-3’ में विवेक ऐसे खलनायक बने हैं, जो जीनियस वैज्ञानिक है। लेकिन उसका शरीर किसी काम का नहीं। वह चल-फिर नहीं सकता। इसलिए वह अपनी सारी शक्ति को मस्तिष्क से ही संचालित करता है।
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