अलग-अलग तरह के किरदार निभाए
किरदारों को लेकर विजय वर्मा ने आगे कहा कि मुझे ऐसा लगा कि मैं कुछ समय के लिए बहुत ही गंभीर किरदारों से दूर रहना चाहता था। इसलिए मैंने 'जाने जान', 'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' और अन्य प्रोजेक्ट किए। लेकिन हां, मैंने उनमें इतना भी मन नहीं लगाया कि यह जान सकूं कि वे इतने गंभीर हैं कि उन्हें ठुकरा दिया जाए। मैंने बस 'सीरियल किलर' सुना और कहा कि मैं यह नहीं करना चाहता। मैं पहले ही ऐसा किरदार निभा चुका हूं।
ग्रे शेड के प्रति दर्शकों का रहता है झुकाव
बातचीत के दौरान दर्शकों के निगेटिव और ग्रे शेड किरदारों के प्रति ज्यादा अट्रैक्ट होने पर विजय वर्मा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज की बात नहीं, यह हमेशा से ऐसा ही रहा है। देवदास को देखिए वह एक बेहद दोषपूर्ण किरदार है। दीवार को देखिए वह एक बेहद ग्रे शेड कैरेक्टर है, हीरो नहीं।
साहित्य ऐसे किरदारों से भरा पड़ा है जिनमें खामियां हैं। नाटक के आइडिया की उपज ही मानवीय खामियों से हुई है। वर्ना नाटक कहां है? विलियम शेक्सपियर से लेकर महाभारत तक, यही हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। इंसान की खामियों से ही हम जुड़ते हैं, यही वह प्रकाश है जो उस दरार से अंदर घुसती है।
17 अप्रैल को रिलीज होगी ‘मटका किंग’
वर्कफ्रंट की बात करें तो विजय वर्मा की ‘मटका किंग’ 17 अप्रैल से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम करेगी। यह सीरीज एक कपास व्यापारी के गैम्बलिंग का किंग बनने की कहानी है। इससे पहले विजय वर्मा आखिरी बार ‘गुस्ताख इश्क’ में नजर आए थे। इस फिल्म को क्रिटिक्स ने सराहा था। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म वो कमाल नहीं दिखा पाई थी।