विजय ने पेश की सफाई
विजय देवरकोंडा ने एक्स पर पोस्ट साझा कर इस मामले के बारे में बात की। 'रेट्रो' प्री-रिलीज इवेंट में अपनी आदिवासी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'यह मेरे ध्यान में आया है कि रेट्रो ऑडियो लॉन्च इवेंट के दौरान मैंने जो टिप्पणी की, उससे जनता के कुछ सदस्यों में चिंता पैदा हो गई है। मैं ईमानदारी से स्पष्ट करना चाहता हूं, किसी भी समुदाय को चोट पहुंचाने या निशाना बनाने का बिल्कुल भी इरादा नहीं था, खासकर हमारे अनुसूचित जनजातियों को, जिनका मैं गहराई से सम्मान करता हूं और उन्हें हमारे देश का अभिन्न अंग मानता हूं।'
विजय की पोस्ट
विजय ने लिखा, 'मैं एकता के बारे में बोल रहा था- कैसे भारत एक है, हमारे लोग एक हैं और कैसे हमें एक साथ आगे बढ़ना चाहिए। मैं किस दुनिया में ऐसा करूंगा, जब हम सभी को एक देश के रूप में एकजुट रहने का आग्रह करते हुए, भारतीयों के किसी भी समूह के खिलाफ जानबूझकर भेदभाव करूंगा, जिन्हें मैं अपने परिवार की तरह, अपने भाइयों की तरह देखता हूं।'
विजय ने आगे लिखा, 'जनजाति' शब्द, जैसा कि मैंने इसका इस्तेमाल किया, ऐतिहासिक और शब्दकोश अर्थ में था, सदियों पहले के समय को संदर्भित करता है, जब वैश्विक स्तर पर मानव समाज जनजातियों और कुलों में संगठित था, जो अक्सर संघर्ष में रहते थे। यह कभी भी अनुसूचित जनजातियों के वर्गीकरण का संदर्भ नहीं था, जिसे औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक भारत के दौरान पेश किया गया था और केवल 20वीं शताब्दी के मध्य में औपचारिक रूप दिया गया था- 100 साल भी नहीं।'
शब्द का भी बताया अर्थ
विजय ने आगे लिखा, 'अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार, 'जनजाति' का अर्थ है- पारंपरिक समाज में एक सामाजिक विभाजन जिसमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक या रक्त संबंधों से जुड़े परिवार या समुदाय शामिल होते हैं, जिनकी एक समान संस्कृति और बोली होती है। यदि मेरे संदेश का कोई हिस्सा गलत समझा गया या चोट पहुंचाने वाला है तो मैं अपना हार्दिक खेद व्यक्त करता हूं। मेरा एकमात्र उद्देश्य शांति, प्रगति और एकजुटता की बात करना था। मैं अपने मंच का उपयोग उत्थान और एकीकरण के लिए करने के लिए प्रतिबद्ध हूं- कभी भी विभाजन के लिए नहीं।'
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