कोर्ट ने कही ये बात
पूजा एंटरटेनमेंट के अनुसार, कंपनी ने तब कोर्ट का रुख किया, जब उन्हें पता चला कि स्ट्रीमिंग, प्रसारण, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संबंधित कमर्शियल चैनलों सहित कई मीडियम से उनकी फिल्मों, संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स का लगातार गलत तरीके से इस्तेमाल, मोनेटाइजेशन कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतरिम सुरक्षा प्रदान करते हुए एक विस्तृत आदेश भी पारित किया।
इसमें सभी पक्षों को विवादित फिल्मों, संगीत कैटलॉग और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के संबंध में मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया। न्यायालय ने माना कि तुरंत सुरक्षा प्रदान न करने से पूजा एंटरटेनमेंट के स्वामित्व और अधिकारों का नुकसान होगा। इस आदेश से कई साल से प्रोड्यूसर्स के अधिकारों के हो रहे हनन से रहत मिलेगी। इसीलिए पूजा एंटरटेनमेंट ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
कंपनी ने कहा कई साल की चुप्पी पर अब मिला इंसाफ
कंपनी का कहना है कि इस तरह की प्रथाओं पर कई साल की चुप्पी के बाद इस आदेश ने आखिरकार उन बेईमान और गैरकानूनी शोषण तकनीकों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। ये एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के मामले में एक बड़ा फैसला है।
यह फैसला अब क्रिएटिव प्रॉपर्टीज के उल्लंघन और गलत तरीके के इस्तेमाल व शोषण के खिलाफ एक सशक्त मिसाल और कड़ी चेतावनी के रूप में काम करेगा। क्योंकि इस आदेश के बाद प्रोड्यूसर के अधिकार लागू करने योग्य हैं। अब इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही मूल रचनात्मक काम की अखंडता फिल्म इंडस्ट्री के लिए सबसे ऊपर है।