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थोड़ी रीयलिटी जरूरी है: वरुण धवन

Fri, 29 Jul 2016 01:52 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
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वरुण धवन नई पीढ़ी के ऐसे ऐक्टर हैं जिनका बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड मजबूत है। अपने काम और निजी जिंदगी दोनों में वह इधर खबरों में रहे हैं। आज वह अपनी नई फिल्म ढिशुम के साथ आ रहे हैं। वरुण धवन से बातचीत की रवि बुले ने।
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पहले के मुकाबले आप दुबले हो गए हैं!
फिल्मों के प्रमोशन के वक्त एक्सरसाइज का टाइम नहीं मिलता। सिर्फ बोलने की एक्सरसाइज होती है। बाकी कसरत नहीं होती। कभी कभी ऐसा लगता है कि फिल्म की बात नहीं, प्रचार कर रहा हूं।

यह आपके काम का ही हिस्सा है।
हां, मगर यह लगता है कि जैसे पॉलिटिक्स में प्रचार होता है, शहर-शहर, सेक्टर-सेक्टर जाकर जैसे वोट मांगते हैं, हम भी वही कर रहे हैं।

नेता पार्टी  के टिकट पर लड़ते हैं और आप टिकट खरीदने की अपील करते हैं।
यह भी उन्हीं जैसे है। लोगों से वादे करते हैं कि हमारी पिक्चर में ये होगा, वो होगा। ऐक्शन होगा, कॉमेडी होगी। हम आपको फिल्म में ये देंगे, वो देंगे।

दर्शक बहुत शक्तिशाली होते हैं

लेकिन पॉलिटिक्स में पांच साल का मौका मिलता है और आपका फैसला शुक्रवार को हो जाता है!
हम लोग अपनी बात से पलट नहीं सकते मगर पब्लिक हमको पलटा सकती है। दर्शक बहुत शक्तिशाली होते हैं।

फिर भी आपको तो काफी प्यार मिला है...!
हां, वो तो है। मैं आपको पिक्चर (ढिशुम) के बारे में बताता हूं। यह 36 घंटे की कहानी है। मिडिल ईस्ट में पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ इंडियन क्रिकेट टीम सीरीज खेल रही है और उसके सबसे ज्यादा फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज विराज शर्मा का फाइनल से पहले अपहरण हो गया है। यह बात मीडिया में किसी को नहीं पता। टीम में किसी को नहीं पता। सिर्फ इंडियन विदेश मंत्रालय को और मिडिल ईस्ट की मिनिस्ट्री को पता है। बात खुल जाएगी तो हंगामा हो जाएगा। अपहरण की पुलिस थ्योरी में एक रूल होता है कि अगर अपहृत व्यक्ति को 36 घंटे में बचा लिया तो वह बच जाएगा मगर उसके बाद चांस कम होते जाते हैं। फिल्म में हमारे (वरुण और जॉन अब्राहम) पास 36 घंटे हैं। मैं अबू धाबी में पुलिस ऑफिसर हूं और जॉन को इंडिया से भेजा जाता है। मुझे हिंदी आती है इसलिए उनके साथ लगा दिया जाता है।

यह लगातार दूसरी फिल्म है (दिलवाले के बाद) जिसमें आप सीनियर ऐक्टर के साथ जोड़ी बना कर काम कर रहे हैं। क्या यह सेफ रास्ते जैसा है?
मुझे लगता है कि यह तो अच्छा है। नई जोड़ियां बनती हैं। जिन्हें सीनियर पसंद हैं वह आकर उन्हें देख लेते हैं, जिन्हें जूनियर पसंद हैं वह उन्हें देख लेते हैं। कैरेक्टर भी अलग-अलग निखर आते हैं। जो काम वो लोग कर सकते हैं, वह करते हैं। जो मैं कर सकता हूं, वह मैं करता हूं। कोई प्रॉब्लम नहीं होती।

जॉन के साथ ईगो बीच में नहीं आई

ईगो की भी समस्या नहीं रहती!
बिल्कुल नहीं। जॉन के साथ तो मुझे लगता था कि किसी हमउम्र के साथ काम कर रहा हूं। वह बड़े ही सहज रहते थे।

भाई रोहित के साथ शूटिंग के दौरान किस तरह काम किया?
शूटिंग शुरू होने से लेकर अभी तक वह मेरे लिए डायरेक्टर है। जब फिल्म रिलीज हो जाएगी तब मेरा भाई वापस आएगा।

यह फिल्म आपको मिली इसकी एक वजह क्या यह नहीं कि रोहित आपके भाई हैं?
यह तो वही बता सकते हैं लेकिन हां, इतना जरूर है कि उन्हें जुनैद अंसारी के रूप में एक यंग, फिट और उत्साही ऐक्टर की जरूरत थी। वह चाहते थे कि ऐसे ऐक्टर को लूं जिसने पहले ऐक्शन न किया हो। ये बातें मेरे हक में गई। शायद इसलिए मुझे चुना।

स्क्रिप्टिंग के दौरान क्या रोहित से आइडियों पर आपकी बात होती थी?
बिल्कुल नहीं। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद मेरे पास आई। मैं नहीं जानता था कि रोहित क्या बनाने वाले हैं। हम इसलिए साथ काम नहीं करते कि भाई हैं। हमें पता है कि जो दर्शक आएगा वह पैसा खर्च करेगा। वह यह नहीं देखेगा कि कौन किसका भाई है, किसका बाप है। उसे तो फिल्म में मजा आना चाहिए। जब स्क्रिप्ट बनी और साजिद नाडियाडवाला ने हां कहा तब मेरी इसमें एंट्री हुई।
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अनिश्चित कुछ नहीं, कुछ भी हो सकता है

मगर जुड़वां के रीमेक की चर्चाएं हैं कि आप लोग मिल कर बना रहे हैं?
हां, यह सच है। हम उसमें शुरू के लेवल से साथ चल रहे हैं। हम जरूर चाहते हैं कि आगे साथ काम करें, बेहतर करें। रोहित दूसरे ऐक्टरों के साथ भी काम करना चाहता है।

बदलापुर में आपके काम की तारीफ हुई। क्या इस तरह की और फिल्में करेंगे?
मैंने उस फिल्म को एक्सपेरिमेंटल मान कर नहीं किया। मैंने उसे श्रीराम राघवन के लिए किया था। उस जॉनर में उनका कोई सानी नहीं है। ऐसी फिल्में मैं करूंगा पर सच यह है कि इंडस्ट्री में अच्छी कहानी ढूंढने में वक्त लगता है।

अच्छी कहानी से क्या मतलब? आप कहानी में क्या ढूंढते हैं?
मैं ढिशुम के उदाहरण से बताऊंगा। अगर मैं दस साल पहले यह आइडिया बताता कि टीम इंडिया के टॉप क्रिकेटर का अपहरण हो गया है तो आप हंसते कि अरे कितनी तो सिक्योरिटी रहती है उनके आस-पास। मगर आज दुनिया इतनी अनिश्चित हो चुकी है कि कुछ भी हो सकता है। काबुल, बगदाद से लेकर मैड्रिड तक विस्फोट हो रहे हैं। अमेरिका जैसे देश पर आतंकी अटैक हो गया। यह दुखद घटनाएं हैं परंतु हम आज मान सकते हैं कि दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी हो सकता है। मुझे लगता है कि एक अच्छी कहानी में थोड़ी रीयलिटी होना जरूरी है।
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