'द केरल स्टोरी' अपने कंटेंट की वजह से इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। इस बीच फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने 10 कट के साथ 'ए' सर्टिफिकेट दे दिया है। बोर्ड की जांच कमेटी ने फिल्म देखने के बाद मेकर्स से इसमें 10 बदलाव करने को कहा था। साथ ही, फिल्म में आंकड़ों के दस्तावेजी प्रमाण भी प्रस्तुत करने को कहा गया था। इस फिल्म के कई डायलॉग और सीन पर सेंसर बोर्ड की कैंची चली है। फिल्म में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री का इंटरव्यू दिखाया गया था जिसे बोर्ड ने हटाने को कहा था।
फिल्म पर चली सेंसर बोर्ड की कैंची
सेंसर समिति की ओर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से "भारतीय" शब्द को हटाने के लिए भी सुझाव दिया गया था। सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित विपुल अमृतलाल शाह की प्रोडक्शन में बनी 'द केरल स्टोरी' में राज्य की चार महिलाओं की कहानी को दिखाया गया है, जिन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए इस्लाम में परिवर्तित किया गया था। फिल्म के ट्रेलर और टीजर के सामने आने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जैसे राजनीतिक दलों ने इसके कंटेंट पर आपत्ति जताई है। इसके पीछे दलों ने यह तर्क दिया है कि यह केरल की नकारात्मक छवि को चित्रित करता है।
शशि थरूर ने उठाए सवाल
बता दें कि हाल ही में शशि थरूर ने भी इस फिल्म की कहानी पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि यह आपके केरल की कहानी हो सकती है, हमारे केरल की कहानी नहीं। इस दौरान उन्होंने चैंलेज भी कर दिया था कि 32 हजार लड़कियों के धर्म परिवर्तन करने का सबूत देने वालों को एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। हालांकि, बाद में उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वह इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं।
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