मनोज बाजपेयी 24 साल पहले बैंडिट क्वीन में डाकू मान सिंह बने थे अब फिर सोन चिड़िया में डाकू मान सिंह बन गए। बैरी, बेईमान, बागी, सावधान। हिंदी सिनेमा की यही विधान है। कभी सोन चिरैया भारत का राष्ट्रीय पक्षी बनने की दावेदार थी और अब लंबी घास वाले इलाकों के खात्मे के चलते विलुप्तप्राय प्रजाति का पक्षी बन चुकी है। देश में गिनती की सोन चिरैया बची हैं, जो बची हैं उन्हें शहर वाले सोन चिड़िया बना चुके हैं।
इश्किया, डेढ़ इश्किया और उड़ता पंजाब वाले अभिषेक चौबे हैं ये। विशाल भारद्वाज की इतनी असिस्टेंटी की है कि हर फ्रेम में सीनियर की छाप साफ नजर आती है। चंबल में मरे पड़े किसी जानवर के क्लोज अप से शुरू होने वाला टीज़र एक नकली से बुंदेलखंडी गांव की झलक दिखाता है। मनोज बाजपेयी, रणवीर शौरी और भूमि पेडनेकर के चेहरे सजाता है और गलती करता है एक ऐसे संवाद की जो बागियों को कभी पसंद न आए। इतिहास गवाह है बागियों ने कभी किसी के पिछवाड़े पर गोली नहीं मारी। जब मारी तो सीधे सीने पर मारी। लेकिन बलिहारी हिंदी सिनेमा में रिसर्च करने वाले शूरवीरों की। यहां सब चलता है। फिल्म को भूरा टिंट देकर इस पर चंबल की धूल का स्वांग भरा गया है। और, तालाब से सोन चिरैया को भी उड़ाया गया है।
और हां टीज़र में सुशांत सिंह राजपूत भी हैं। केदारनाथ की रिलीज के एक दिन पहले सारा अली खान का फिल्म सिम्बा का दोयम दर्जे का गाना और केदारनाथ की रिलीज के दिन सोन चिड़िया का टीजर। सिनेमा अब ऐसे ही समीकरणों से शोहरत पाता है। कहानी और कलेवर? वो किस चिड़िया का नाम है।