अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहे कामरा ने यह भी कहा कि असहिष्णुता की संस्कृति बढ़ रही है, जहां किसी भी चीज को अपराध मान लेने को मौलिक अधिकार के तौर पर देखा जा रहा है और यह इसे “बेहद लोकप्रिय राष्ट्रीय घरेलू खेल” के तौर पर बढ़ाया जा रहा है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को कामरा को उच्चतम न्यायालय के खिलाफ उनके कथित विवादास्पद ट्वीट को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी थी।
अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कामरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत देते हुए कहा था कि हास्य कलाकार के ट्वीट “अच्छी भावना” में नहीं थे और अब समय आ गया है कि लोग यह समझें कि उच्चतम न्यायालय पर बेवजह निशाना साधने पर सजा मिलेगी।
किसी व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिये अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति जरूरी है। उच्चतम न्यायालय की आपराधिक अवमानना में 2000 रुपये का जुर्माना और छह महीने तक कैद की सजा हो सकती है।