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‘मेरा मकसद कठोर सच्चाई पर बात करना’, सुदीप्तो सेन ने बताया क्यों बनाई ‘चरक - फेयर ऑफ फेथ’? ओटीटी पर कही ये बात

Fri, 27 Feb 2026 10:00 AM IST
Aradhya Tripathi एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Sudipto Sen: निर्माता-निर्देशक सुदीप्तो सेन ने बताया आखिर क्यों उन्होंने ‘चरक - फेयर ऑफ फेथ’ का किया समर्थन? जानिए ओटीटी पर सुदीप्तो सेन ने क्या सवाल उठाए…
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चरक फिल्म पर सुदीप्तो सेन ने की बात - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आगामी फिल्म ‘चरक - फेयर ऑफ फेथ’ ‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन द्वारा समर्थित फिल्म है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र पर बात करने वाली इस फिल्म को लेकर सुदीप्तो सेन का कहना है कि यह फिल्म सच्ची मानवीय कहानियों को बयां करती है और समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर करती है। उनका मानना है कि इस फिल्म का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि घटनाओं को वैसे ही दिखाना है जैसे वे घटी थीं, भले ही वास्तविकताएं असहज क्यों न हों।

मानवीय कहानी मुझे आकर्षित करती है

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सुदीप्तो सेन ने ‘चरक - फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर विस्तार से बात की। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने उन चुनौतियों के बारे में बताया जो अक्सर सामाजिक रूढ़ियों से टकराने वाली मानवीय कहानियों को चित्रित करने में आती हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी मानवीय कहानी मुझे बहुत आकर्षित करती है। 'द केरल स्टोरी' की शुरुआत चार लड़कियों से हुई और मैं 3,500 लड़कियों से मिला। इसलिए, मैंने सोचा कि मुझे उनकी कहानी बतानी चाहिए।
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जिस तरह से मैं अपनी कहानी कहता हूं, मैं सच्चाई के जितना करीब हो सकता हूं, उतना पहुंच सकता हूं। हालांकि, मेरा उद्देश्य कभी भी विवादास्पद फिल्में बनाना नहीं रहा है, बल्कि असहज सच्चाइयों को प्रकाश में लाना रहा है। एक कलाकार के रूप में,  एक कहानीकार के रूप में, मुझे लगता है कि यह कहानी सुनाई जानी चाहिए। किसी को तो इसे सुनाना ही चाहिए था। इसलिए शायद मैंने इसे चुना है।

सुदीप्तो सेन - फोटो : सोशल मीडिया

बहस और चर्चा के बाद मिली सेंसर से मंजूरी
निर्माता ने आगे बताया कि उनकी फिल्म को सेंसर बोर्ड ने विस्तृत बहस और चर्चा के बाद मंजूरी दी है। जब मैं सेंसर बोर्ड से मिला, तो कई बहसें हुईं, जो मुझे बहुत महत्वपूर्ण लगीं। पैनल में 30 वर्ष की आयु के युवा सदस्य और 70-75 वर्ष की आयु के वरिष्ठ सदस्य दोनों शामिल थे। शुरू में कुछ लोगों को लगा कि फिल्म साधु-संतों की आलोचना करती है। लेकिन वे समझ गए कि यह समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद शोषणकारी प्रथाओं को दिखाती है।

ओटीटी अब सेफ खेलता है
सुदीप्तो सेन ने संवेदनशील विषयों से निपटने में ओटीटी प्लेटफॉर्म के दृष्टिकोण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक या कमर्शियल सक्सेस के दबाव के बजाय कहानी पर ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है कि ओटीटी अब सेफ खेल खेल रहा है। अगर कोई धार्मिक या सामाजिक मुद्दा आता है, तो वे उससे बचते हैं। चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव। मैं बचपन से ही लोगों के दर्द के बारे में बात करता आया हूं। हमें हमेशा सच्चाई के साथ रहना चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए, सच्चाई की जीत होगी।

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चरक - फेयर ऑफ फेथ - फोटो : सोशल मीडिया
6 मार्च को रिलीज होगी फिल्म
शीलादित्य मौलिक द्वारा निर्देशित 'चरक: आस्था का मेला' भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित अंधविश्वास और रीति-रिवाजों पर बात करती है। फिल्म के ट्रेलर में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की भयावह सच्चाइयों को दिखाया गया है। सुदीप्तो सेन द्वारा निर्मित यह फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यह पवित्र मेले की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो एक पारंपरिक त्योहार है जिसमें गहरी भक्ति और खतरनाक अनुष्ठान शामिल होते हैं। फिल्म में अंजली पाटिल, साहिदुर रहमान, सुब्रत दत्ता, शशि भूषण, नलनीश नील, शंखदीप और शौनक श्यामल सहित कई दमदार कलाकार हैं।
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