प्रेमानंद महाराज से मिली सुधा
प्रेमानंद महाराज से मिलने के पल को याद करते हुए सुधा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, 'जिस गुरु ने कई साल तक मुझे प्रेरणा दी, उनसे आखिरकार मिलना बहुत खास पल था। मेरी आंखों में खुशी के आंसू थे। वहां का माहौल और ऊर्जा शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।' सुधा ने यह भी बताया कि महाराज के प्रवचन अक्सर उनके मन के सवालों के जवाब दे देते हैं। रात को जो सवाल मन में उठते हैं, अगली सुबह उनके प्रवचन सुनने पर उनके जवाब मिल जाते हैं।
सुधा को है ईश्वर पर अटूट विश्वास
सुधा चंद्रन ने कहा कि कई साल पहले हुई एक सड़क दुर्घटना में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया था। उस मुसीबत से उबरने में उनका ईश्वर में अटूट विश्वास सबसे बड़ी मदद बना। सुधा ने कहा, 'दुर्घटना के बाद मैं उबर पाई, तो सिर्फ ईश्वर के विश्वास की वजह से। प्रेमानंद महाराज जी भी यही कहते हैं कि हमेशा नाम जप करते रहो। ईश्वर में जो विश्वास है, वही हर मुश्किल से पार लगाता है।'
सुधा चंद्रन ने आगे कहा कि जब इंसान का ईश्वर में विश्वास मजबूत होता है, तो दर्द तो रहता है, लेकिन ध्यान दर्द पर नहीं रहता। ध्यान भगवान पर और जिंदगी की बड़ी चीजों पर चला जाता है। इससे इंसान को ताकत मिलती है। उन्होंने कहा, 'मुश्किलें तो जिंदगी में आती ही रहती हैं, लेकिन भक्ति और समर्पण के आगे वो दर्द बहुत छोटा लगने लगता है। मेरा विश्वास, मेरी मेहनत और खुद पर भरोसा - इन तीनों ने मुझे आगे बढ़ाया।'