भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले आज पंचतत्व में विलीन हो गईं। 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहने वाली आशा भोसले का जाना संगीत जगत की एक अपूर्णीय क्षति है। ऐसे में फिल्मों से लेकर संगीत जगत से जुड़े कई दिग्गजों ने अपने-अपने तरीके से आशा ताई को याद किया है। इसी क्रम में विवेक ओबेरॉय, शान और सुदेश भोसले ने भी आशा ताई को याद करते हुए उनसे जुड़ी अपनी यादें साझा की हैं।
मुझे बच्चे की तरह प्यार देती थीं आशा ताई
आशा भोसले के अंतिम संस्कार के बाद मुंबई के शिवाजी पार्क से निकलते हुए गायक सुदेश भोसले ने आशा भोसले को याद करते हुए उनके साथ जुड़े अपने अनुभव को साझा किया। सिंगर ने कहा, ‘1986 से उनके साथ मेरी कई यादें जुड़ी हैं। वह मुझे अपने शो में ले जाती थीं। एक गायिका से कहीं बढ़कर, वह मुझे अपने बच्चे की तरह प्यार करती थीं। वह रियाज पर खास ध्यान देती थीं। तमाम मुश्किलों के बावजूद वह हमेशा सकारात्मक रहीं। उनके गीत हजारों साल तक अमर रहेंगे।’
उनको काफी ज्यादा संगीत की समझ थी
गायक शान ने भी आशा भोसले के साथ अपने लगाव के बारे में बात की। उन्होंने कहा, ‘आशा ताई दृढ़ निश्चयी थीं और अपनी शर्तों पर जीवन जीती थीं। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ जीवन बिताया। कई मौकों पर हमें डांट भी लगाई और तारीफ भी की। मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे मुझे अपने पसंदीदा गायकों में से एक मानती थीं। वो सिंगिंग के बारे में सिखाती रहीं। एक बार एक रियलिटी शो में एक आवाज को हमने पसंद नहीं किया था। तब उन्होंने कहा था कि ये बहुत आगे जाएगा। फिर अगले सीजन में वो विनर बन गया। संगीत को लेकर उनकी समझ काबिल-ए-तारीफ थी। अगर कोई उनका 10 प्रतिशत भी समझ ले, तो वह संगीत प्रेमी बन जाएगा।’
90वें जन्मदिन पर दुबई में दी थी यादगार परफॉर्मेंस
अभिनेता विवेक ओबेरॉय आशा भोसले को अपने परिवार के काफी करीब मानते हैं। उनके 90वें जन्मदिन के बारे में याद करते हुए अभिनेता ने बताया, ‘हाल ही में जब वो दुबई आई थीं, तो हमने उनके 90वें जन्मदिन पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था। जब वो दुबई में थीं, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या वो दो घंटे गाएंगी, तो उन्होंने कहा कि चार घंटे गाऊंगी। फिर उन्होंने परफॉर्मेंस दी। स्टेडियम में जबरदस्त उत्साह था, उनका जादू ही ऐसा था। मैं अपने बच्चों से उनके पैर छूने को कह रहा था, क्योंकि हमारा मानना था कि उनमें मां सरस्वती का वास है। वे मेरे पिता की आवाज की सराहना करती थीं और मेरे पिता उनकी।’