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मीना कुमारी से बड़ा है "मीना कुमारी कॉम्पलेक्स"

Thu, 01 Aug 2013 12:52 PM IST
रोहित मिश्र
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पिछले साल रिलीज हुई विशाल भारद्वाज की फिल्म 'मटरू की बिजली का मनडोला' में एक डायलॉग है। इमरान खान फिल्म की नायिका अनुष्का शर्मा से कहते हैं कि मुझे पता चल गया कि तुम्हें मीना कुमारी कॉम्पलेक्स है। अनुष्का पूंछती हैं कि "यह" क्या होता है। जबाव मिलता है कि यही तो खराबी है नई पीढ़ी में। वह मीना कुमारी और उनके कॉम्पलेक्स को नहीं जानती।
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हल्के-फुल्के मूड में मीना कुमारी को दिया गया यह कॉम्पलीमेंट या कमेंट दरअसल मीना कुमारी की हकीकत है। यह हकीकत उनके साथ भी रही और बाद भी। मीना कुमारी की चर्चा उनकी फिल्मों से ज्यादा उनकी खूबसूरती और उनकी जिंदगी आए दुख और उतार-चढ़ावों की ज्यादा होती रही है।

मीना कुमारी इन दुखों की इतनी आदी हो गयी थीं कि उन्हें दुख अच्छे लगने थे। इतने अच्छे कि वह अब दुख में ही सुखी और संतुष्ट रहतीं। जब वह खुश होतीं तो उनका लगता कि खुशी के ये लम्हें पानी के एक बुलबुले हैं जो क्षण में फूटकर पानी में मिल जाने वाले हैं। मीना की इसी सोच को एक शब्द में व्याख्यित करने के लिए फिल्म इंडस्ट्री ने इसे "मीना कुमारी कॉम्पलेक्स" का एक विशेषण दे दिया।
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बचपन के नाम पर कुछ नहीं

मीना कुमारी की नानी गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के छोटे भाई की बेटी थीं और मां प्रभावती नाच और गाने का शौक रखने वाली थिएटर की एक कलाकार। मुंबई के ही एक पारसी थिएटर में प्रभावती की मुलाकात थियेटर के हारमोनियम वादक मास्टर अली बख्श से हुई। उन्होंने प्रभावती से निकाह कर उसे इकबाल बानो बना दिया। अली बख्श से इकबाल बानो को तीन संतानें हुईं। खुर्शीद, महज़बी और महलका। महजबीं ही बाद में मीना कुमारी के नाम से जानी गईं।

फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी बातें कही जाती हैं कि मीना कुमारी के पिता का अफेयर उनकी ही नौकरानी के साथ शुरु हो गया। वह सारा पैसा उस नौकरानी पर खर्च करते। उनका अपना परिवार आर्थिक तंगी से गुजरने लगा।

खर्च चलाने की जिम्मेदारी अब महजबीं उर्फ मीना कुमारी की थी। कहा जाता है कि मीना कुमारी को उनकी मां ने महज सात साल की उम्र में ही फिल्मकार विजय भट्ट के सामने पेश कर दिया था। एक बाल कलाकार के रूप में कुछ काम देने के लिए। उन्हें काम भी मिला। पर यह अभिनय न था बल्कि रोजगार था। घर चलाने के लिए मजबूरी में किया गया रोजगार।

कमाल अमरोही के साथ निकाह, फिर अलगाव

एक नायिका के रूप में मीना कुमारी बैजू बावरा फिल्म से मकबूल हुईं। विजय भट्ट ने ही इस फिल्म को बनाया। इसी दौरान वह शायर और फिल्मकार कमाल अमरोही के संपर्क में आईं। मीना को भी एक पुरुष साथी के सहारे की जरूरत थी। इन दोनों ने निकाह कर लिया। हालांकि कमाल साहब शादीशुदा थे और मीना उनकी दूसरी बीवी बनीं।

कमाल अमरोही और मीना कुमारी की शादीशुदा जिंदगी करीब दस साल तक चली। यह संबंध भी टूटा। इसकी दो वजहें मानी जाती हैं पहली वजह मीना कुमारी को कोई संतान न होना दूसरी वजह मीना कुमारी का कैरियर कमाल अमरोही से तेज चलना रहा है।

फिल्म इंडस्ट्री एक किस्सा बड़ा चर्चित रहा है। एक कार्यक्रम में फिल्मकार महबूब खान ने महाराष्ट्र के गर्वनर से कमाल अमरोही का परिचय यह कहकर दिया कि ये प्रसिद्ध स्टार मीना कुमारी के पति हैं। कमाल अमरोही यह सुनकर सुन्न से रह गए थे कि उनकी पहचान अब उनकी पत्नी के पति के रूप में हो रही है।

अलगाव की बुनियाद उसी फिल्मी कार्यक्रम में पड़ गयी थी। इस रिश्ते को तोड़ने में बची-कुची कसर धर्मेंद्र ने पूरी कर दी। मीना कुमारी के साथ उनके अफेयर की खबरों से सस्ताऊ फिल्मी पत्रिकाओं काले-सफेद पन्ने अफेयर की रंगीन खबरों से पटे होते थे। 1964 आते-आते यह संबंध तलाक के साथ खत्म हो गया।

डूबीं शराब और शायरी में

कमाल अमरोही के साथ संबंधों ने मीना कुमारी को बुरी तरह से तोड़ दिया था। उन्हें शराब की लत लग गई। इसी बीच वह शायरी भी करने लगीं। हां फिल्में इस दौर में भी चलती रहीं। 'बहू बेगम', 'बहारों की मंजिल', 'मंझली दीदी', 'फूल और पत्थर', 'चित्रलेखा' और 'साहब बीवी और गुलाम' फिल्मों से वह शोहरत की ऊंचाई छूती गईं।

लेकिन अकेलेपन के जिस नासूर को वह शराब खत्म करना चाहती थीं उसे न तो समय-समय पर उनकी जिंदगी में आने वाले प्रेमी दूर कर पाए और न ही शराब। कमाल अवरोही से तलाक मिलने का गम उन्हें अपनी 39 साल की छोटी सी जिंदगी के अंतिम लम्हें तक रहा। मीना कुमारी के ही लिखे एक शेर से इसे समझते हैँ
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"तलाक तो दे रहे हो नजरें-ए-खैर के साथ
जवानी भी मेरी लौटा दो मेहर के साथ"

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