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जानिए मदहोश करने वाली 'फिल्मी बारिश' की कहानी

Sun, 14 Jul 2013 10:40 AM IST
संगीता अवस्थी
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हिंदी फिल्मों का दौर कोई भी रहा हो रोमांस की लपट को बारिश की बूंदें हमेशा ही तेज करती रही हैं। फिल्म 'श्री 420' के गाने "प्यार हुआ इकरार हुआ" से लेकर हाल ही में रिलीज हुई 'आशिकी 2' के गाने बारिश से तरबतर होते रहे हैं। जानिए सेट पर कैसे होती है यह फिल्मी बारिश।
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डांस की मस्ती हो, रोमांस का अहसास हो, मन में चलते झंझावात हों या कि एक्शन सीन। बारिश हो जाती है, तो सीन जम जाता है। लेकिन दृश्य में अचानक ये बारिश लाता कौन है? कौन है, जो पानी की फुहारों से सीन का इमोशनल अत्याचार दोगुना कर देता है। बारिश की ये बूंदें दरअसल रचते हैं बॉलीवुड के बारिशबाज।

एक वक्त था, जब परदे पर बारिश रचने वाले फिल्म के आर्ट डायरेक्टर या फिर सेट डिजाइनर हुआ करते थे। बस एक पानी के टैंकर और स्प्रिंकलर्स से बारिश करा दी जाती थी। एक दौर ऐसा भी आया जब फिल्म में रोमांटिक दृश्य में बारिश जरूरी हो गई, इसलिए इसे अंजाम देने वालों की टीम भी अलग बनी।
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नब्बे के दशक के बाद से ही सीन में बारिश कराने वाली छोटी-छोटी प्रोफेशनल फर्म्स सामने आने लगीं। `दिल तो पागल है', `देवदास',  `मोहरा', `हम दिल दे चुके सनम', `ताल' जैसी फिल्मों में रेन सीक्वेंस रचने वाले दिनेश यादव ने 1994 के लगभग अपनी तिरंगा एंटरप्राइज फर्म शुरू की थी।

दिनेश यादव बताते हैं, `जिन फिल्मों के सेट डिटेल में और बड़े होते हैं, उनमें कुछ दिन लगते हैं, वरना एक-दो दिन में काम निपट जाता है। जब बजट बढ़िया होता है, तो सीन भी तफसील से फिल्माया जाता है।'

नकली बारिश के लिए चाहिए होते हैं पानी के टैंकर और फुहार बनाने वाले नॉजल। जितने नॉजल, उतना ज्यादा पैसा। छह नॉजल वाले एक टैंकर का लगभग एक हजार रुपया लगता है। नॉजल बढ़ने पर ही पैसा बढ़ता है। भारी बारिश दिखाने के लिए कई नॉजल उपयोग में लाए जाते हैं और लागत बीस हजार तक पहुंच सकती है। हालांकि कभी तीस दिन लगातार काम मिल जाता है, तो कभी पांच दिन भी मुश्किल से ही मिलता है।

टीवी पर भी बारिश
नकली बारिश केवल बड़े परदे तक ही नहीं सीमित है। फिल्मों के अलावा टीवी, विज्ञापन और टेलीविजन शोज में भी बारिश कराने की खूब डिमांड है। नकली बारिशबाज बने हंसमुख सोलंकी और शिवा ने इन सभी के लिए बारिश का इंतजाम खूब किया है।

टीवी शोज `परिचय', `बड़े अच्छे लगते हैं' और हाल ही में शो `संस्कार' वगैरह में ऐसे बारिश के सीक्वेंस खूब देखने को मिले हैं। सोलंकी कहते हैं, `अब इसमें अच्छा-खासा कैरियर है। एक या दो सप्ताह में एक बार हर शो में बारिश का सीक्वेंस आ ही जाता है। हमें टीवी से बिजनेस ज्यादा मिलता है।'  

दरअसल भारतीय रूढ़िवादी दर्शकों के लिए वेस्टर्न कल्चर के टच के साथ रोमांस को परदे पर उतारने के लिए डायरेक्टर्स ने बारिश में भीगी हीरोइन के गाने और डांस के सीक्वेंस रचने शुरू किए। राजकपूर ने नरगिस, मंदाकिनी, जीनत अमान और डिंपल कपाड़िया को बारिश में फिल्माकर नए ट्रेंड की शुरुआत की।
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