अभी तक मुकदमा नहीं हुआ है खत्म
यह फिल्म कथित तौर पर भगवा आतंकवाद और 2008 के मालेगांव बम विस्फोटों पर आधारित है। फिल्म 15 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के ट्रेलर की स्क्रीनिंग एनआईए न्यायाधीश ए.के लाहोटी के समक्ष की गई थी। इसके अलावा मालेगांव बम विस्फोटों का मुकदमा अभी अंतिम चरण में है, इसलिए आरोपी समीर शरद कुलकर्णी ने अपनी याचिका में कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और अंतरिम रूप से इसकी रिलीज पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि यह फिल्म अदालत के आदेशों का उल्लंघन करती है। कुलकर्णी ने यह भी दावा किया कि फिल्म मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाएगी और आरोपियों की सुरक्षा पर असर डालेगी। मामले की पैरवी कर रही एनआईए की राय के लिए मामला 5 नवंबर को रखा गया था, इसके बाद जज ने इसे 6 नवंबर के लिए पोस्ट कर दिया।
आरोपी समीर शरद कुलकर्णी
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रोक की मांग-टाइटल पर आपत्ति
अर्जी में कहा गया है कि फिल्म मालेगांव बम विस्फोट मामले से जुड़े विषय पर आधारित है और मुकदमा अभी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए अदालत को फिल्म की रिलीज पर रोक लगा देनी चाहिए। इसके अलावा समीर कुलकर्णी ने फिल्म के टाइटल पर भी आपत्ति जताई।
क्या है मालेगांव बम धमाका मामला
29 सितंबर 2008 को मालेगांव बम धमाके में करीब छह लोगों की जान चली गई थी, जबकि इस धमाके में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में कुल सात आरोपी हैं, जिनमें से एक समीर कुलकर्णी है। यह मामला पिछले 16 सालों से कोर्ट में चल रहा है।