इस वजह से धर्मेंद्र ने कर दिया था मना
श्रीराम राघवन ने आगे बताया कि अभी यह सब राइटिंग के लेवल पर ही था। जब मैं उनसे मिला और उन्हें इस भूमिका के बारे में बताया, तो उन्होंने कहा, 'रॉ, प्रमुख, यार, तुम लोग वही करते हो। यह भारत-पाकिस्तान होगा, मैं यह नहीं करना चाहता'। वह इसमें शामिल नहीं होना चाहते थे। मैंने कहा, 'मैं इसका सम्मान करता हूं'। फिर, हमने उस कहानी को आगे नहीं बढ़ाया।
धर्मेंद्र को पसंद आई थी ‘इक्कीस’ की कहानी
बातचीत के दौरान श्रीराम राघवन ने धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म 'इक्कीस' में उनके साथ काम करने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि धर्म जी उन पहले लोगों में से थे, जिन्हें मैंने कहानी सुनाई थी। उन्हें यह कहानी बेहद पसंद आई।
उनके साथ काम करने का तरीका यह है कि मैं उनके पास सीन लेकर जाता हूं और कहता हूं, 'देखते हैं हम क्या कर सकते हैं।' उनके पास विचारों का भंडार था। उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ था। मुझे याद है मैंने उनसे कहा था कि फिल्म में उनकी एक कविता जरूर होनी चाहिए और उन्होंने सुझाव दिया ऐसा कुछ हो सकता है।
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अरुण खेतरपाल के जीवन पर आधारित है ‘इक्कीस’
इसी साल 1 जनवरी को रिलीज हुई 'इक्कीस' सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अगस्त्य नंदा ने अरुण खेतरपाल की भूमिका निभाई है। जबकि धर्मेंद्र ने उनके पिता का किरदार अदा किया है। फिल्म को क्रिटिक्स से काफी सराहना मिली थी और धर्मेंद्र को निधन के बाद बड़े पर्दे पर देखकर फैंस काफी भावुक हो गए थे।