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पर्दे पर निभाया समलैंगिक किरदार और बनीं सुर्खियां

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बॉलीवुड की फिल्मों में समलैंगिकता पर्दे पर खुल कर परोसी जाने लगी है। वहीं देश में समलैंगिकता को लेकर अपने-अपने मत हैं। पर्दे पर ऐसे किरदारों के आते ही विवाद शुरू हो जाता है। पर्दे पर समलैंगिक प्रोफसर का किरदार निभाने जा रहे मनोज वाजपेयी के कारण एक बार फिर समलैंगिकता की चर्चा है।
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बॉलीवुड में मनोज वाजपेयी गंभीर भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले मनोज वाजपेयी ने 'सत्या', 'शूल', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'राजनीति' जैसी फिल्में करके अपनी एक अलग छवि बनाई है। उन्होंने कभी ऐसा रोल नहीं किया है।

इस चुनौती वाले किरदार पर मनोज बाजपेयी ने कहा कि वह हंसल मेहता के साथ एक फिल्म कर रहे हैं। जिसमें उनका किरदार 60 साल के समलैंगिक प्रोफेसर का है। इस फिल्म की शूटिंग जनवरी से शुरू हो जाएगी।
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हंसल मेहता की यह फिल्म अलीगढ़ विश्वविद्यालय के एक निलंबित प्रोफेसर की जिंदगी से प्रेरित है, जो कि रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले रिक्शा चालक के साथ सेक्स करते हुए कैमरे में कैद हो गया था।

'फायर' की समलैंगिकता ने पर्दे पर लगाई थी आग

1996 में दीपा मेहता की आई फिल्म फायर में दिखाए गए दो महिला किरदारों के आपसी रिश्तों पर काफी बवाल मचा। फिल्म इश्मत चुगताई के उपन्यास 'लिहाफ' पर आधारित है।

पर्दे पर इन किरदारो को शबाना आजमी और नंदिता दास ने निभाया था। फिल्म में दोनों का रिश्ता सास-बहू का दिखाया गया है। सेंसर ने फिल्म के कई हिस्सों पर कैंची चलाई तब जाकर फिल्म रिलीज हो पाई थी।

बाद में फिल्म की दूसरे भाग की घोषणा करने पर मामला गर्मा गया और फिल्म ठंढे बस्ते में चली गई। वहीं महिला समलैंगिकता को लेकर बनी फिल्म 'गर्लफ्रेंड' की भी काफी चर्चा हुई। फिल्म में दो लड़कियों की कहानी है। जो एक दूसरे को पसंद करने लगती हैं।

'बॉम्गे' 'मैंगो सुफले' हैं गे फिल्म की लिस्ट में

राहुल बोस की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'बॉम्गे' ने देश की पहली गे फिल्म होने का दावा किया था। फिल्म मुम्बई के पृष्ठभूमि पर बनी है। हालांकि फिल्म की पूरी शुटिंग देश से बाहर हुई थी।

फिल्म का मुख्य किरदार आर राजा राव अपने डाइरेक्टर रियाद विंसी वाडिया से संबंध रखता है। फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म को पहली भारतीय समलैंगिक फिल्म के रूप में प्रचारित किया। इस फिल्म में मुम्बई की समलैंगिक संस्कृति की पड़ताल की दिखाया गया है।

वहीं साहित्य अकादमी पुरस्कार महेश दत्तानी ने 'मैंगो सफल' 2002 में बनाई। इस फिल्म पर फायर की तरह कोई हो हल्ला नहीं मचा। इस फिल्म को समलैंगिकता की स्वीकृति के रूप में देखा गया। फिल्म में एक समलैंगिक फैशन डिजाइनर की कहानी को पर्दे पर फिल्माया गया है।  फिल्म मॉय ब्रदर निखिल में भी समलैंगिक रिश्तों को और एड्स के विषय को उठाया गया है।

2010 में आई 'डू नो वाई-ना जाने क्यों' ने तो समलैंगिकता को लेकर तहलका ही मचा ‌दिया। फिल्म में दो अभिनेताओं के बीच संभोग दृश्य को दिखाया गया था। हालांकि सेंसर ने इसे खारिज कर दिया।
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फैशन, दोस्ताना और कल हो न हो में भी था समलैंगिकता का प्रदर्शन

बॉलीवुड की मुख्यधारा फिल्मों में भी गाहे-बगाहे समलैंगिकता का प्रदर्शन किया जाता रहा है। 'कल हो ना हो' और 'दोस्ताना' कुछ ऐसी ही फिल्में हैं जिसमें समलैंगिकता कॉमेडी की चास्नी में लपेट कर पेश की गई है।


बॉलीवुड में माना जाता है कि करन जौहर समलैंगिकता के पैरोकार हैं। इसको लेकर उनकी कई बार आलोचना भी हुई है। उनकी कई फिल्मों में ऐसा दिखता भी है वहीं 'बॉम्बे टॉकीज' में तो उनका किरदार भी इससे प्रेरित रहा। ऐसी ही एक 2009 में समलैंगिक कॉमेडी फिल्म 'स्ट्रेट' आई। फिल्म में मुख्य भूमिका विनय पाठक ने निभाई है। 2008 में आई 'फैशन' में भी समलैंगिक फैशन डिजाइनर के बहाने समलैंगिकता को उठाया गया है।


ऐसी ही एक फिल्म हनीमून ट्रैवल्स प्रा लिमिटेड में एक नवविवाहित जोड़े को दिखाया गया है। फिल्म में जब पत्नी को यह पता चलता है कि उसका पति समलैंगिक है तो उसका दिल टूट जाता है।  

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