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साउथ के किन सितारों ने मचाई थी धनुष जैसी धूम?

Thu, 27 Jun 2013 01:05 PM IST
दिनेश श्रीनेत
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पहले “कोलावेरी डी” गीत की वजह से और अब ‘रांझणा’ की रिलीज़ के बाद धनुष जैसे छा गए हैं। फिल्म जितनी ही चर्चा धनुष की भी हो रही है।
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फिल्म देखकर हॉल से बाहर निकलने पर कुंदन का किरदार सबसे ज्यादा लोगों की जुबान पर है। बनारस की गलियों में भटकने वाले एक तमिल पुजारी के बेटे के किरदार में उन्होंने सबका दिल जीत लिया है।

मगर धनुष अकेले साउथ के सितारे नहीं हैं जिन्होंने उत्तर भारतीयों का दिल जीता... आइए जानें इससे पहले दक्षिण के किन अभिनेताओं ने अपनी पहली फिल्म के जरिए धूम मचा दी थी।
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'एक दूजे के लिए' से हिट हुए कमल हसन

सन 1981 में फिल्म 'एक दूजे के लिए' के साथ कमल हासन ने हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। निर्देशक के बालाचंदर ने बड़ी समझदारी से ऐसी कहानी चुनी जो हासन की दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि से मेल खाती थी। यह साउथ के नवयुवक और उत्तर भारतीय युवती की प्रेम कहानी थी।

"हम बने तुम बने", "तेरे मेरे बीच में" और "मेरे जीवन साथी" जैसी गाने पूरे साल हिट रहे और फिल्म तो ब्लाकबस्टर की लिस्ट में शामिल हो ही गई। फिल्म हिट होते ही कमल हासन की खराब फिल्में हिन्दी में डब होकर रिलीज होने लगीं, जो उन्होंने कॅरियर के शुरुआती दौर में की थीं, जिसका उन्हें काफी नुकसान हुआ।

एंग्री मैन के रूप में दिखे रजनीकांत

रजनीकांत सन 1983 में 'अंधा कानून' के साथ हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर अवतरित हुए। फिल्म हिट रही। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि अंधा कानून राजनीति, कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करती थी। जो उस दौर में पॉपुलर हो रहा ट्रेंड था।

हिट होने की एक बड़ी वजह यह भी थी कि अंधा कानून में हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन जैसे जाने पहचाने चेहरे मुख्य भूमिकाओं में थे। रजनीकांत के बोलने, चलने और एक्शन के खास अंदाज को लोगों ने काफी पसंद किया। रजनीकांत को भी खराब डब फिल्मों ने बाद में बहुत नुकसान पहुंचाया।

दर्शकों को पसंद आए चिरंजीवी

तेलुगु फिल्म 'अंकुशम' के रिमेक 'प्रतिबंध' के साथ चिरंजीवी ने बॉलीवुड में कदम रखा। यह फिल्म सुपरहिट भले न हुई हो मगर ठीक-ठाक चली। जुही चावला को इसी फिल्म के लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवार्ड मिला और फिल्म के खलनायक रामी रेड्डी के वन लाइन डॉयलाग लोगों को खूब पसंद आए।

इस फिल्म में चिरंजीवी ने भ्रष्ट व्यवस्था से हताश एक पुलिसवाले की भूमिका को बेहतर तरीके से निभाया। उनका आक्रोश और ऐक्शन दोनों ही भारतीय दर्शकों को पसंद आया। मगर चिरंजीवी इसके बाद एक-दो फिल्मों में नजर आए जो खास नहीं चलीं।  

नागार्जुन का एक्‍शन

नागार्जुन की 'शिवा' कई मायनों में ट्रेंड सेटर फिल्म थी। फिल्म का एक्शन बिल्कुल अलग तरह का था। गाने बहुत कम थे और तकनीकी तौर पर फिल्म काफी परिष्कृत थी। लीड किरदार के रुप में नागार्जुन ने भी लोगों को चकित कर दिया था।

फिल्म के शुरुआती कुछ दृश्यों में निर्देशक जानबूझकर उन्हें हाइलाइट नहीं करता। मगर पहले एक्शन दृश्य सामने आता है तो हाल तालियों से गूंज उठता है। उन्होंने फिल्म में काफी कम संवाद बोले थे और शारीरिक भाव-भंगिमाओं के जरिए प्रभावित किया। नागार्जुन बाद में 'द्रोही', 'ख़ुदा गवाह', 'क्रिमिनल' और 'एलओसी' जैसी फिल्मों में प्रभावशाली भूमिकाओं में दिखे।

रोमांटिक हीरो के रूप में जमे व्यंकटेश

व्यंकटेश की पहली फिल्म 'अनाड़ी' में गांव के सबसे दबंग जमींदारों के परिवार की इकलौती खूबसूरत लड़की और उसी परिवार के एक नौकर की प्रेम कहानी को लोगों ने खूब पसंद किया। फिल्म के हिट होने की वजह उसका ड्रामा, बेहतर फिल्मांकन और शानदार एक्शन दृश्य थे।
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फिल्म में सभी मसाले थे। हास्य, ऐक्शन, रोमांस, ऊंच-नीच का संघर्ष- तो फिल्म को तो हिट होना ही था। दक्षिण के अन्य अभिनेताओं की तरह व्यंकटेश कभी हिन्दी सिनेमा को लेकर महत्वाकांक्षी नहीं हुए। उन्होंने साउथ की इंडस्ट्री को ही अपना कर्मक्षेत्र बनाया।
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