गायक: विशाल ददलानी, श्रेयस पुराणिक
गीतकार: प्रशांत इंगोले, संगीतकार: संजय लीला भंसाली
फिल्म: मलाल
यूट्यूब चैनल: टी सीरीज
संजय लीला भंसाली हिंदी सिनेमा के नए शो मैन हैं, इसमें दो राय नहीं है। अपनी ही फिल्म गुजारिश से उन्होंने बतौर संगीतकार भी काम करना शुरू किया और गोलियों की रासलीला-रामलीला, बाजीराव मस्तानी व पद्मावत जैसी फिल्मों से संगीत की अपनी समझ पर कामयाबी की मोहर भी लगाई।
तीनों फिल्में एक काल्पनिक समय काल की फिल्में रहीं और लोक संगीत से उठाई धुनों पर बने इन फिल्मों में संजय के संगीत को मापने के लिए इसीलिए कोई पैमाना भी नहीं रहा। लेकिन, मलाल आज के समय की फिल्म है। एक मराठी लड़के और एक उत्तर भारतीय लड़की की इस प्रेम कहानी में ही संजय लीला भंसाली के संगीत ज्ञान का असली इम्तिहान होना है।
मलाल का पहला गाना फिल्म के हीरो शिवा से लोगों का परिचय कराता है। म़ॉडल सुश्री मिश्रा के साथ नाचते मीजान में वैसी ही ऊर्जा है जैसी लोगों ने सांवरिया के रणबीर कपूर में देखी। गाना विशाल ने गाया है और श्रेयस का रैप भी है साथ में, लेकिन गाना असर नहीं छोड़ पाता। प्रशांत इंगोले के बोल लड़खड़ाते हैं। गाने में मौसीकी से ज्यादा तुकबंदी है, मुखड़े के बोल हैं, मेरी जवानी पे तू है दीवानी, तेरी दो आंखों ने दी है बयानी। बयान को बयानी बनाने में ही गाने के तेवर ठंडे पड़ जाते हैं और हिंदी सिनेमा के गीतों के श्रोता इससे कुछ ज्यादा चाहते हैं।
गाना वही हिट होता है जो बिना फिल्म के संदर्भ के भी कार, पार्टी या अकेले में बजाया जा सके। संजय लीला भंसाली की कल्पना इस गाने में यहीं मात खाती है। मराठी शब्दों से हिंदी पट्टी के श्रोता बैर नहीं मानते है। आइला रे उन्होंने पहले भी तमाम हिंदी गानों में सुन रखा है। हीरो को मस्तमौला दिखाने के लिए बनाया गया ये गाना न तो सम सामयिक संगीत के पैमाने पर खरा उतरता है और न ही संजय लीला भंसाली की खुद की पिछली फिल्मों में गढ़ी गई कसौटी पर।