ट्रैवलिंग गाइड से सिनेमा के लौह पुरुष तक का सफर
सोहराब मोदी पारसी थे, मगर वे जिस शैली में हिंदी और उर्दू बोलते थे दर्शक-श्रोता भौंचक रह जाते थे। कहा जाता है सोहराब मोदी अपने मिजाज की फिल्में बनाना जानते थे। सोहराब मोदी सबसे पहले अपने भाई केकी मोदी के साथ ट्रैवलिंग गाइड बन गए। फिर, 26 साल की उम्र में उन्होंने आर्या सुबोध थिएट्रिकल कंपनी की शुरुआत की। रंगमंच का पर्दा गिरते ही जनता खूब तालियां बजाती, लेकिन वह नाटक मूक थे। वर्ष 1935 में उन्होंने स्टेज फिल्म कंपनी शुरू की। इसके तहत उन्होंने 'खून का खून' और 'सईद ए हवस' शीर्षक वाली दो फिल्में बनाईं। हालांकि, दोनों ही फिल्में फ्लॉप रहीं। 1936 में उन्होंने मिनर्वा मूवीटोन फिल्म कंपनी शुरू की और पहली फिल्म बनाई 'मीठा जहर'।
'मीठा जहर' ने दी करियर को रफ्तार
सोहराब मोदी की फिल्म 'मीठा जहर' दर्शकों को पसंद आई। फिर मोदी ने 'पुकार' बनाई। फिल्म की कहानी मशहूर फिल्मकार कमाल अमरोही ने लिखी और इसमें सोहराब के साथ चंद्र मोहन और नसीम बानो ने अभिनय किया। फिल्म की वास्तविकता दर्शकों को बहुत पसंद आई और फिल्म ने कमाल कर दिया। कहा जाता है कि उस दौर में सोहराब मोदी 'पुकार' का रीमेक बनाना चाहते थे और दिलीप कुमार को जहांगीर के रोल के लिए साइन करना चाहते थे, लेकिन दिलीप नहीं चाहते थे कि उनकी तुलना पुकार के अभिनेता चंद्रमोहन से हो जो इस फिल्म से रातोंरात स्टार बन गए थे।
बनाई देश की पहली टेक्नीकलर फिल्म
इसके अलावा सोहराब मोदी ने 'पृथ्वी वल्लभ', 'शीश महल', 'झांसी की रानी', 'मिर्जा गालिब' और 'कुंदन' जैसी फिल्में बनाईं। सोहराब मोदी की फिल्म 'झांसी की रानी' (1953) देश की पहली टेक्निकलर फिल्म रही। सोहराब ने हॉलीवुड तकनीशियनों की मदद से अपनी इस रंगीन फिल्म को बनाया। उन्होंने खुद इस फिल्म में राजगुरु का किरदार निभाया। फिल्म में झांसी की रानी का किरदार सोहराब मोदी की पत्नी मेहताब ने निभाया। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी।