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एक दर्जन नई फिल्में पहुंची ओटीटी पर, देखिए क्या कह रहे आगरा, देहरादून के सिंगल स्क्रीन थिएटर वाले

Wed, 01 Jul 2020 01:41 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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भुज, लक्ष्मी बम, बिग बुल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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इस साल रिलीज के लिए प्रस्तावित 12 फिल्में अब तक अलग अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी रिलीज बुक करा चुकी हैं। अमिताभ बच्चन से लेकर अभिषेक बच्चन, अक्षय कुमार, अजय देवगन आलिया भट्ट, आयुष्मान खुराना जैसे दिग्गज कलाकारों की फिल्में थिएटर में रिलीज होने का इंतजार करने से कतरा रही हैं। और अब भी सिनेमाघरों के खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अक्टूबर में सिनेमाघरों को खोलने के आसार बन रहे हैं लेकिन इसके बाद भी सबसे ज्यादा परेशानी सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों को उठानी पड़ेगी क्योंकि उनके सामने आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली स्थिति बनी रहेगी।

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देश में सिनेमाघरों को बंद हुए लगभग चार महीने हो चुके हैं। तभी से इन सिनेमाघरों की कमाई ठप हो चुकी है। जबकि, इन्हें अपनी प्रॉपर्टी का टैक्स और सैलरी तो लगातार चुकानी ही पड़ रही है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित छायादीप सिंगल स्क्रीन सिनेमा के मालिक अजमत सिराज खान का कहना है कि उनका हॉल 22 मार्च से ही बंद है। हमारे तो मरने जैसे हालात हैं। सरकार की तरफ से तो बिजली के बिल में भी राहत नहीं मिल रही है। ऊपर से हमें अपने सिनेमा हॉल का रख रखाव और स्टाफ का खर्चा चुकाना ही पड़ रहा है।

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सिनेमा हॉल - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
हालांकि, देश में सिनेमाघरों के अक्टूबर के महीने से खुलने को लेकर बातचीत जारी है लेकिन इस पर भी अजमत को भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर सिनेमाघर खुल भी जाते हैं तो भी दर्शक फिल्म देखने नहीं आने वाले। चाहे फिल्म सलमान खान की हो या फिर आमिर खान की। ज्यादातर लोग तो ओटीटी पर ही फिल्में देखने में व्यस्त हैं। और जो निचले दर्जे के हैं, उन्हें अपनी जान की हद से ज्यादा परवाह है। इसलिए वह फिल्म देखने नहीं आएंगे। इसके लिए तो सरकार को भी दोष नहीं दिया जा सकता। बस दिक्कत इस बात की है कि सरकार ने एक सैनिटाइजेशन विभाग और बना दिया है जिसको अब हर महीने का पांच से छह हजार रुपये और देना पड़ेगा। मुझे लगता है कि हार कर हमें अपना सिनेमाघर बंद ही करना पड़ेगा।'

आगरा स्थित श्री टॉकीज के मालिक निमित अग्रवाल के भी विचार कुछ मिलते जुलते ही हैं। वह बताते हैं कि उनका टॉकीज पिछले 16 मार्च से बंद है। उन्होंने बताया, 'हमारी बंदी सबसे लंबी होने वाली है। सरकार की तरफ से न तो सिनेमाघरों को खोलने में राहत मिल पा रही है और न ही बिजली के बिल में भी कोई राहत दी जा रही है। पक्का तो कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन अक्टूबर के पहले सप्ताह से यहां आगरा में सिनेमाघरों के खुलने के आसार हैं। हमारा नुकसान तो सिनेमाघरों के खुलने के बाद भी होगा। क्योंकि फिल्म देखने के लिए लोग इतने आएंगे नहीं जितना हमारा सिनेमाघर के रखरखाव में खुद का ही खर्चा होगा।'

दिल्ली के शाहीन बाग स्थित एक सिनेमाघर का तो और भी ज्यादा बुरा हाल है। इसके एमडी गुरमीत सिंह सेबल बताते हैं कि दिसंबर से लेकर फरवरी तक तो शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने जमावड़ा लगा रखा था और फिर मार्च में कोरोना वायरस की वजह से सब कुछ बंद हो गया। तो उनका थिएटर तो कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन से पहले से ही प्रभावित था। अक्टूबर में भी अगर सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाघर खुल जाते हैं तो उनकी आमदनी इतनी नहीं होगी जितने में वह खुद का खर्चा भी उठा सकें।

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