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शेखर कपूर ने माइक्रोड्रामा के बढ़ते चलन पर की बात, कहा- भारत में इसकी मार्केट वैल्यू 1.5 बिलियन डॉलर के करीब

Sun, 28 Jun 2026 03:30 PM IST
Aradhya Tripathi एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Shekhar Kapur: शेखर कपूर ने माइक्रोड्रामा को लेकर अपने विचार रखे। साथ ही उन्होंने भारत में इसकी मार्केट वैल्यू के बारे में भी जानकारी दी। जानिए क्या है माइक्रोड्रामा…
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शेखर कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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शेखर कपूर ने फिल्म बनाने में एआई के इस्तेमाल को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाने में कभी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई है। हाल ही में उन्होंने अपनी 1983 की मशहूर फैमिली ड्रामा फिल्म 'मासूम' की एआई से बनी 'बिहाइंड-द-सीन्स' तस्वीर भी शेयर की थी। अब शेखर कपूर ने इंटरनेशनल फिल्म इंडस्ट्री में एक और नई चीज माइक्रोड्रामा पर अपना ध्यान लगाया है। शेखर कपूर का दावा है कि भारतीय माइक्रोड्रामा मार्केट की वैल्यू 1.5 बिलियन डॉलर है।

पूरी दुनिया माइक्रोड्रामा के बारे में बात कर रही

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शेखर कपूर ने आज अपने एक्स हैंडल पर इसको लेकर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘पूरी दुनिया अचानक माइक्रोड्रामा के बारे में बात कर रही है। ऐसा करना भी चाहिए। चीन में 2026 के आखिर तक इसकी वैल्यू लगभग 150 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है।

यह उनकी फिल्मों के सालाना बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का लगभग दोगुना है, जबकि इसकी लागत बहुत कम है। 2026 में भारतीय माइक्रोड्रामा मार्केट की वैल्यू 1.5 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। अगर तुलना करें तो 2026 के लिए भारतीय थिएट्रिकल बॉक्स ऑफिस की वैल्यू भी 1.5 बिलियन डॉलर ही है।’

क्या है माइक्रोड्रामा?

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माइक्रोड्रामा एक छोटी, वर्टिकल फॉर्मेट वाली वीडियो सीरीज होती है जिसे मोबाइल पर देखने के हिसाब से बनाया जाता है। माइक्रोड्रामा का एक एपिसोड आमतौर पर 1 से 2 मिनट का होता है। भारत में माइक्रोड्रामा के लिए कुछ सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म में रीलशॉर्ट, पॉकेट एफएम, गुडशॉर्ट और फ्लिक टीवी वगैरह शामिल हैं। ये ज्यादातर इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमोशन के जरिए चलते हैं।

‘मुगल-ए-आजम’ और ‘शोले’ जैसी फिल्में नहीं बना सकता माइक्रोड्रामा
हालांकि, एआई की तरह ही शेखर कपूर को भी लगता है कि माइक्रोड्रामा अभी पारंपरिक सिनेमा मॉडल को पूरी तरह से खत्म करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि माइक्रोड्रामा से 'मुगल-ए-आजम', 'शोले', 'मिस्टर इंडिया' या 'मासूम' जैसी फिल्मों के बनने की उम्मीद न करें। क्योंकि यह उस तरह का बिजनेस नहीं है। माइक्रोड्रामा बड़े पैमाने का बिजनेस है।

इसीलिए टेक्नोलॉजी कंपनियों और मौजूदा प्लेटफॉर्म की तरफ से बड़े मार्केट शेयर पर कब्जा करने और निवेश करने की होड़ सबसे पहले दिखती है। अब एआई प्रोडक्शन को ज्यादा कुशलता और कम लागत में बड़े पैमाने पर करने के बड़े मौके देता है।



लेकिन कहानी कहने की कला? बड़े पैमाने पर काम और एआई एक आकर्षक बिजनेस विजन हो सकते हैं, लेकिन क्या कहानी कहने की कला को बड़े पैमाने पर किया जा सकता है? यह देखना अभी बाकी है।
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शेखर कपूर - फोटो : सोशल मीडिया

माइक्रोड्रामा को अभी पहचान बनाना बाकी है
शेखर कपूर ने बताया कि वह पिछले दो साल से अपनी आने वाली फिल्म 'मासूम 2: ए न्यू जेनरेशन' की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। लेकिन इसे माइक्रोड्रामा फॉर्मैट में नहीं ढाला जा सकता। अपनी पोस्ट में 'मासूम' का पोस्टर लगाते हुए उन्होंने कहा कि माइक्रोड्रामा को अभी अपनी पहचान बनानी है। क्या यह बिजनेस का एक शानदार आइडिया है? हां। क्या इससे बेहतरीन कहानियां सामने आएंगी? यह तो वक्त ही बताएगा।

'मासूम 2: ए न्यू जेनरेशन' में नजर आएगी ऐसी कास्ट
'मासूम 2: ए न्यू जेनरेशन' शेखर कपूर की ‘मासूम’ का स्पिरिचुअल सीक्वल है। यह फिल्म शबाना और नसीरुद्दीन को फिर से एक साथ लाएगी। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी और नित्या मेनन भी हैं और साथ ही यह शेखर और उनकी एक्स-वाइफ सुचित्रा कृष्णमूर्ति की बेटी कावेरी कपूर की भी थिएटर में रिलीज होने वाली पहली फिल्म होगी।

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