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खरी बातें कहने के लिए पहचाने जाने वाले शेखर कपूर ने दिग्गजों को धोया

Thu, 24 Mar 2016 09:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
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शेखर कपूर
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खरी बातें कहने के लिए पहचाने जाने वाले निर्देशक शेखर कपूर ने अब बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों पर सवाल उठाए हैं कि कहां खड़ा है उनका सिनेमा? कपूर का मानना है कि दुनिया भर की फिल्में और दर्शक ग्लोबल हो रहे हैं, ऐसे में हमारे तथाकथित बड़े निर्देशक कोई वैश्विक फिल्म क्यों नहीं बना पा रहे?
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निर्देशक शेखर कपूर की प्रतिभा से सब परिचित हैं। मासूम, मिस्टर इंडिया और बेंडिट क्वीन बनाने वाले शेखर ने हॉलीवुड में भी कामयाब फिल्में बनाई हैं। बीते कई वर्षों से वह जल संकट की आशंका वाली अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म पानी बनाने की कोशिश में हैं, मगर बॉलीवुड में बात नहीं बन सकी। यहां उन्हें ऐक्टर तो मिले परंतु निर्माता नहीं। अब इस फिल्म को छोड़ कर वह हॉलीवुड में नई फिल्म बना रहे हैं। परंतु उन्होंने हाल में बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों को ऐसा आईना दिखाया है कि किसी के पास जवाब नहीं है। अपने इंस्टग्राम अकाउंट पर ब्रिटेन के एक स्टोर में लगे दीपिका पादुकोण के विज्ञापन की तस्वीर डालते हुए शेखर ने कई तीखी बातें लिखी हैं।

विज्ञापन में दीपिका की फोटो के साथ शेखर ने लिखा कि मैं ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट से गुजर रहा था और मैंने विशाल विज्ञापन में लगी एक तस्वीर देखकर महसूस किया कि यह तो हमारी अपनी दीपिका है। यह बेहद उत्साहजनक है कि शबाना आजमी के साथ हमारी नायिकाओं ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जो पहचान बनानी शुरू की थी, उसे ऐश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा (क्वांटिको) और दीपिका पादुकोण आगे बढ़ा रही हैं। इसके बाद शेखर ने तेवर बदले हुए लिखा कि बॉलीवुड के हीरो कहां हैं और निर्देशकों को क्या हो गया है? शेखर के अनुसार, लंचबॉक्स बनाने वाले निर्देशक रितेश बत्रा की सफलता के अलावा आज किसी भारतीय निर्देशक का नाम विदेश में दर्ज नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि मीरा नायर ने जरूर हमारा झंडा विदेश में ऊंचा किया था। उनकी मानसून वेडिंग हमेशा मेरे मस्तिष्क में रहती है।
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इसके बाद शेखर ने बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों के नाम लेते हुए उनकी खिंचाई की और लिखा कि हमारे सफल निर्देशकों करन जौहर, आदि चोपड़ा, राजकुमार हिरानी और संजय लीला भंसाली के बारे में आखिर क्या कहें? वास्तव में यह दौर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का है। शेखर ने कहा कि अक्सर बॉलीवुड के निर्देशक कहते हैं कि हम अपने मार्केट और अपने दर्शकों के साथ खुश हैं। यह बात जमती नहीं। शेखर ने दावा किया कि बॉलीवुड का दर्शक ग्लोबल हो चुका है। ऐसे में वह बॉलीवुड से भी अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी के सिनेमा की उम्मीद रखता है। जबकि आज की फिल्में वैसी नहीं हैं। शेखर ने तीखा वार किया कि हमारी फिल्में तो चीन की फिल्मों की तुलना तक में बराबर नहीं बैठतीं।

शेखर ने बताया कि वह इन दिनों अपनी हॉलीवुड फिल्म विल की शूटिंग कर रहे हैं। यह अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपीयर की जिंदगी का ड्रामा है जब उन्हें प्रसिद्धि नहीं मिली थी। फिल्म रोमियो एंड जूलियट, मूला रूज, ग्रेट गेट्सबे, स्ट्रिक्ट्ली बॉलरूम के लेखक क्रेग पीयर्से ने इसे लिखा है।

शेखर की बातें।।।
-कॉमर्शियल हिंदी सिनेमा मृत्युशैया पर है। ऐसा इसकी दूरदृष्टि की वजह से है। विश्व सिनेमा ग्लोबल हो रहा है और बॉलीवुड के फिल्मकार एक-दूसरे की पीठ थपथपा रहे हैं।
-बॉलीवुड फिल्मकारों को दर्शकों की बुद्धिमत्ता पर सवाल उठाना बंद करना चाहिए और अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि कैसे उनमें खुद अब दृष्टि नहीं बची है।
-अगर बॉलीवुड के निर्देशक नहीं सुधरे तो जल्द ही अपने दर्शक विश्व/हॉलीवुड सिनेमा तथा विदेशी टीवी धारावाहिकों के डब संस्करणों के हाथों खो देंगे।
-निर्देशक और फिल्म कंपनियां नहीं देख पा रही हैं कि सिनेमाघरों में पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या तेजी से गिर रही है।
-95 फीसदी भारतीय दर्शकों की हैसियत मल्टीप्लेक्स के महंगे टिकट खरीदने की नहीं है।
-चीनी, कोरियाई और अन्य एशियाई देशों के सिनेमा से हम पीछे हैं। न केवल लोकप्रियता में बल्कि अंतरराष्ट्रीय समारोहों में मिलने वाले सम्मान के मामले में भी।
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