सिंगर-कंपोजर के तौर पर आज बॉलीवुड में शंकर महादेवन की एक अलग पहचान है। उनका संगीत की दुनिया का यह सफर कैसे शुरू हुआ? एहसान-लॉय के साथ जोड़ी कैसे बनीं? किस गाने को गाकर वह पॉपुलर हुए? शंकर महादेवन के जन्मदिन (3 मार्च 1967) पर जानिए, उनके करियर और पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें।
शंकर महादेवन का जन्म मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ। उन्हें बचपन में ही हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग परिवार ने देनी शुरू कर दी थी। कम उम्र में ही शंकर महादेवन को संगीत का अच्छा ज्ञान हो गया। साथ ही वह अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देते रहे। पढ़ाई पूरी करने के कुछ वक्त बाद ही शंकर महादेवन ने फैसला लिया कि वह संगीत दुनिया में ही करियर बनाएं। जानिए, गायक-संगीतकार शंकर महादेवन के करियर, पर्सनल लाइफ से जुड़ी खास बातें।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से बने गायक-संगीतकार
शंकर महादेवन की बचपन से ही संगीत में रुचि रही, वह इसमें एक्सपर्ट भी बन गए थे। लेकिन पढ़ाई को भी उन्होंने इग्नोर नहीं किया। मुंबई के ही एक कॉलेज से उन्होंने कंप्यूटर साइंस की डिग्री ली, आगे चलकर बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम भी किया। लेकिन कुछ वक्त नौकरी करने के बाद शंकर महादेवन को लगा कि उन्हें अपना करियर भी संगीत की दुनिया में बनाना चाहिए। आखिर में शंकर महादेवन पूरी तरह से संगीत की दुनिया में आए।
एक सांस में गाना गाने के लिए हुए फेमस
साल 1988 में शंकर महादेवन एक एल्बम ‘ब्रेथलेस’ लेकर आए। इस एल्बम में उन्होंने एक गाना गाया ‘कोई जो मिला तो मुझे ऐसा लगता…’। इस गाने को वह बिना सांस लिए गाते हुए महसूस होते थे, थोड़ा भी ब्रेक नहीं लेते हैं। इस गाने ने ही शंकर महादेवन को संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान दी, दर्शक भी उन्हें इस गाने के कारण ही पहचानने लगे। शंकर की इस एल्बम को उस साल बेस्ट नॉन फिल्म एल्बम का स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला था। आज भी जब शंकर महादेवन ‘ब्रेथलेस’ सॉन्ग को परफॉर्म करते हैं, दर्शक दिल थामकर सुनते हैं।
एहसान-लॉय के साथ शंकर की बनीं जोड़ी
शंकर महादेवन की जो पॉपुलैरिटी आज है, वह केवल उनकी ही मेहनत का नतीजा नहीं है, इसमें एहसान और लॉय नाम के दो लोगों का भी योगदान है। एहसान नूरानी एक गिटार वादक हैं और लॉय मैनडोसा की-बोर्ड प्लेयर हैं, वह इलेक्ट्रोनिक फ्यूजन म्यूजिक तैयार करते हैं। शंकर, एहसान और लॉय तीनों एक बैंड के तौर पर सालों पहले साथ आए थे। साल 1980 में एहसान मुंबई में जिंगल्स (रेडियो एड) बनाने का काम करते हैं, वहीं लॉय टीवी के लिए राइटिंग किया करते थे। आगे चलकर यानी 1989 में एहसान के जिंगल्स में शंकर गाना गाने लगे। फिर तीनों ने मुकल आनंद की फिल्म ‘दस(1997)’ में साथ काम किया। इस फिल्म का एक गाना ‘हिंदुस्तानी’ का काफी फेमस हुआ। इसके बाद ही शंकर, एहसान और लॉय ने एक म्यूजिक बैंड बना लिया। तब से लेकर अब तक ये तीनों ‘दिल चाहता है’, ‘तारे जमीं पर’, ‘रॉक ऑन’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ जैसे कई और हिट फिल्मों के लिए म्यूजिक बना चुके हैं।