बॉलीवुड के मशहूर गायक शंकर दासगुप्ता की आज पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर आइए आपको बताते हैं। उनके जीवन से जुड़ी कहानी, साथ ही उनके शानदार गानों के बारे में। 1946 में, उन्हें अपनी फिल्म मिलन-46 में अनिल विश्वास के साथ ब्रेक मिला। करियर के शुरुआत में ही शंकर दासगुप्ता ने गया हुआ उनका पहला गाना ही काफी पॉपुलर हुआ था। इस गाने की सफलता के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
बंगाल से जुड़े हैं शंकर दासगुप्ता
बंगाल में साल 1927 में जन्में मशहूर गायक शंकर दासगुप्ता ने 39 फिल्मों के लिए 63 गाने चुके हैं। शंकर दासगुप्ता को उनकी आवाज और अलग तरह के गानों के लिए जाना जाता है।
शंकर दासगुप्ता ने गाए ये गाने
शंकर दासगुप्ता को ने करके मजबूर कहां ले आई हो -शीशे की दीवार (1954), रोटी बिना जीवन है- दो रोटी फिल्म, खटमल आन बसो खटियन में- लकी नंबर 1961, राम दुहाई छोड़ कलाई- अंधेर नगरी चौपट राजा (1955), हम क्यों बताएं तुमसे- जान पहचान (1950) जैसी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू चलाया है।
ट्रेन हादसे में गई शंकर दासगुप्ता की जान
गायक शंकर दासगुप्ता का निधन मुंबई में एक ट्रेन हादसे के दौरान हुआ था, जब वे किसी काम से भारत आए थे। यह उनकी आखिरी भारत यात्रा रही। किसी काम के सिलसिले में शंकर भारत आए थे, इस दौरान वे मुंबई में ट्रेन एक्सिडेंट के शिकार हो गए। उनके इस दुखद निधन के बारे में उनके प्रशंसक आज भी बातें करते हैं।
न्यूज चैनल में किया काम
शंकर दासगुप्ता ने कई सालों तक टीवी और न्यूज चैनल में भी काम किया था। इसके साथ वे म्यूजिक कंपोजर अनिल विश्वास और जयदेन की मदद भी करते थे। काम से रिटायर होने के बाद वे इंग्लैंड जाकर बस गए थे। शंकर दास गुप्ता को आज भी उनके बेहतरीन गानों के लिए जाना जाता है।