पहले बैन की चर्चा और अब फिल्म का नाम बदलने की अटकलें। शाहिद कपूर-आलिया भट्ट स्टारर उड़ता पंजाब की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। 2016 की सबसे विवादास्पद फिल्मों की सूची जब बनेगी तब इसका नाम संभवतः सबसे ऊपर रहेगा।
सेंसर बोर्ड द्वारा उड़ता पंजाब में सुझाए गए 40 कट के बाद ट्रिब्यूनल में गई इस फिल्म पर सोमवार को फैसला आएगा। सूत्र बता रहे हैं कि ट्रिब्यूनल ने बीते शुक्रवार को फिल्म देखी और कहा कि वह सोमवार को लिखित निर्णय निर्माताओं तक पहुंचा देगा।
अपुष्ट सूत्र बता रहे हैं कि ट्रिब्यूनल ने निर्माता-निर्देशक से कहा है कि वह शीर्षक में से पंजाब हटा दें क्योंकि इससे राज्य विशेष की छवि खराब होती है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि फिल्म की कहानी में से पंजाब राज्य या वहां के शहरों के नाम से जुड़े खास संदर्भों को भी हटाया जाना चाहिए।
असल में, पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और इस फिल्म में राज्य के युवाओं को नशे की गिरफ्त में दिखाया जा रहा है। यहां चल रहे ड्रग्स के रैकेट की बातें इसमें हैं। कुछ राजनीतिक दलों को यह बात जम नहीं रही है और ऐसे में फिल्म को लेकर विवाद बढ़ रहा है।
'फिल्म को राजनीति का शिकार बनाया जा रहा'
निर्माताओं का कहना है कि फिल्म को राजनीति का निशाना बनाया जा रहा है। लगातार विवाद के कारण इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ाने की नौबत आ चुकी है। इसे पहले ही एक हफ्ता आगे बढ़ाया गया था, मगर जिस तरह के सेंसरशिप विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा उससे ट्रेड के जानकार मान रह हैं कि 17 जून की रिलीज और आगे बढ़ सकती है।
उधर, पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका फिल्म को राज्य में प्रतिबंधित करने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन पंजाब में कुछ धार्मिक और राजनीतिक संगठनों को फिल्म के नाम पर कड़ी आपत्ति है। उनका कहना है कि फिल्म में पंजाब को गलत रोशनी में दिखाय गया है।
एक समय पंजाब की पहचान देशभक्ति, बहादुर फौजियों, लहलहाते खेतों और बेहतरीन खिलाड़ियों की वजह से होती थी। परंतु फिल्म में आज के युवाओं को नशीले पदार्थों की लत में डूबा दिखाने से राज्य और इसके युवाओं की छवि खराब होती है। इस पूरे विवाद के लिए फिल्म के कई निर्माताओं में से एक अनुराग कश्यप ने मीडिया को जिम्मेदार को ठहराया है।
उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया है। मीडिया में कुछ लोगों ने अपने मन से यह बात लिख दी।
नशे वाले दृश्य बने हैं परेशानी का सबब
उल्लेखनीय है कि फिल्म पर सेंसर द्वारा सुझाए कट्स के बाद निर्माताओं के पक्ष से जैसी प्रतिक्रिया आई थी उससे कई लोगों को लगा कि फिल्म को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। जबकि सेंसर ने साफ कहा था कि वह फिल्म में दिखाए गए नशा करने के दृश्यों और गालियों को हरी झंडी नहीं दे सकता। हालांकि इससे पहले फिल्म के ट्रेलर को सेंसर ने मंजूर कर दिया था।
विवाद बढ़ा तो निर्माताओं ने मीडिया में यह बात लिखित रूप में कही कि उनकी फिल्म को बैन नहीं किया गया है। उड़ता पंजाब के निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड की सिफारिश के अनुरूप रिवाइजिंग कमेटी में जाने से साफ इंकार कर दिया।
जानकारों का कहना है कि यदि ट्रिब्यूनल फिल्म का टाइटल बदलने को कहता है कि निर्माता-निर्देशक की मुश्किल बढ़ेगी है क्योंकि ऐन वक्त पर नाम बदलना आसान नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि 2013 में संजय लीला भंसाली को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ा था। जब उनकी फिल्म का टाइटल कोर्ट के आदेश के बाद राम-लीला से बदल कर गोलियों की रासलीलाः राम-लीला किया गया था।