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पढ़िए, परीकथा जैसी है बादशाह खान की जिंदगी

Tue, 03 Nov 2015 09:01 AM IST
कुमार अतुल/अमर उजाला, मुरादाबाद
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आज फिल्म अभिनेता शाहरुख खान जिस हैसियत में हैं उनपर कई शोध ग्रंथ लिखे जा सकते हैं। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और बिना गॉडफादर के बालीवुड के बादशाह तक का उनका फिल्मी सफर किसी परीकथा जैसा लगता है। लेकिन वे पुरुष सिन्ड्रेला सरीखे नही हैं । उनकी कामयाबी किसी जादू की छड़ी से नहीं आई है।
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शाहरुख ने आज की हैसियत हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की है। वह लीक पर नहीं चले। उन्होंने अपने प्रतिमान खुद गढे हैं। शाहरुख उस दौर में बालीवुड के फलक पर उभरे जब अमिताभ, विनोद खन्ना, जितेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे सितारों का आभामंडल कम हो रहा था। उस दौर के ज्यादातर फिल्मी सितारे अपनी ही गढ़ी छवियों के दुर्ग में इतनी मजबूती से कैद थे कि उनका निकलना नामुमकिन हो रहा था।

सर्कस, फौजी जैसे टीवी सीरियलों से शुरुआत करने वाले शाहरुख बड़े पर्दे के लिए बने थे। यह बात उन्होंने बहुत जल्द साबित भी कर दी। एक विधवा से दीवानगी हद तक इश्क में डूबे युवक का किरदार उन्होंने इतनी प्रमाणिकता के साथ निभाया कि दीवाना फिल्म में रिषी कपूर जैसे मंझे कलाकार भी निस्तेज नजर आए। बाजीगर और डर जैसी फिल्मों में एन्टी हीरो का रोल करने का रिस्क सिर्फ शाहरुख ही उठा सकते थे।
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अपना प्यार पाने के लिए किसी का खून बहाने से गुरेज न करने वाले युवक की इमेज पर दर्शक भी फिदा हो बैठे । बाद में शाहरुख ने दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, कुछ कुछ होता है, मोहब्बतें, वीरजारा जैसी फिल्मों से सात्विक प्रेमी के किरदार निभाए जिन्होंने उन्हें घर घर का दुलारा बना दिया । प्रेम की अपार ऊर्जा लिए इस कलाकार के पीछे करोड़ो युवतियां दीवानी हो चली।

इसे संयोग ही कहिए कि शाहरुख असल जिंदगी में भी एक आदर्श और जुनूनी प्रेमी का किरदार निभा चुके हैं । फिल्म लाइन में हिट होने से पहले ही शाहरुख गौरी से शादी कर चुके थे । ग्लैमर की दुनिया में दिनरात जुड़े रहने के बाद भी शाहरुख का नाम कभी किसी दूसरी हिरोइन से नही जोड़ा गया । यह भी उनकी चारित्रिक दृढता का उदाहरण है। ऐसा नहीं है कि शाहरुख हर फिल्म में कामयाब ही रहे हों।

कई फिल्मों की नाकामी ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया। विश्व सिनेमा के सर्वाधिक कमाई करने वाले सितारों में शुमार शाहरुख ने अपनी सफल पारी में बड़े बड़े किरदार निभाए है। गली मोहल्ले के साधारण महत्वाकान्छी युवा से लेकर सुपरहीरो तक। लेकिन शाहरुख डीडीएलजे के राज और मोहब्बतें के आर्यन जैसी भूमिकाओं में कहीं ज्यादा विश्वसनीय दिखते हैं। रुपहले पर्दे पर शाहरुख काजोल और शाहरुख जूही चावला की केमिस्ट्री खूब जमी है।

सफलता के नए कीर्तिमान गढने वाली कई फिल्मों में काजोल उनकी हिरोइन रही हैं । यह भी अजब संयोग है कि असल जिंदगी में काजोल शाहरुख से छत्तीस का आकड़ा रखने वाले अजस्र देवगन की पत्नी हैं जिनके साथ उन्होंने प्रेम विवाह रचाया है। अरसे बाद काजोल की शाहरुख के साथ फैन फिल्म आ रही है जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। इस साल पचास के हो रहे शाहरुख आलिया भट्ट सरीखी अपनी आधी से भी कम उम्र की हिरोइनों के साथ काम कर रहे हैं।

बालीवुड में सर्वाधिक प्रभावशाली हैसियत रखने वाली खान त्रयी के बारे में एक अजब संयोग है। तीनों 1965 में पैदा हुए। फिल्मी करियर के मामले में शाहरुख अपेक्षाकृत जूनियर हैं। आमिर खान और सलमान उनसे पहले सिनेमा में स्टारडम का स्वाद चख चुके थे । तीनों खानों की दुश्मनी की हदतक कट्टर प्रतिद्वंद्विता की कहानियां खूब चटखारे लेकर सुनी पढ़ी जाती रही हैं। कुछ हदतक इसे ये स्वीकार भी करते हैं।

तीनों में आमिर के भीतर क्लास के साथ मास को कनेक्ट करने की अद्भुत क्षमता है। सलमान मास के बेताज बादशाह हैं । इनके बरअक्स शाहरुख ने मास और क्लास दोनों वर्गों के दर्शकों मे अपनी जबरदस्त पैठ बनाई है। शाहरुख थोड़े तुनकमिजाज भी हैं । अपनी ही दोस्त फराह खान के पति की पिटाई हो या सार्वजनिक कार्यक्रमो मे मनोज कुमार जैसे सीनियर की मिमिक्री हो कई बार वह विवादों में भी घिर जाते है।

अमिताभ बच्चन को अपना आदर्श मानने वाले शाहरुख ने डान सीरीज जैसी फिल्मों से उनसे बड़ी लकीर खींचने की कोशिशों के चलते अमिताभ फैन्स के निशाने पर रहे । दक्षिण पंथियों की ओर से एकाध बार उनपर पाकिस्तान की हिमायत करने के आरोप लगाए गए । लेकिन लोग भूल गए कि यह शाहरुख ही थे जिन्होंने अटल जी के गीतों पर जगजीत सिंह के गाए अलबम में भी अभिनय किया था ।

शाहरुख एक सुपरस्टार हैं जिनमें बेशक राजेश खन्ना जैसा चुम्बकीय आकर्षण और अमिताभ जैसा मैनरिज्म बेशक न हो पर अपने बूते गढी गई शानदार पर्सनैलिटी की ऐसी कशिश जो तकरीबन ढाई दशक से लोगों को अपना दीवाना बनाए हुए है । निजी जिंदगी के शुरुआती दौर में शाहरुख खासे चोट खाए शख्स थे। कैन्सर से पिता की मौत और बाद में बीमार मां को तिल तिल मरता देखने की वजह से वह परिवार की अहमियत को बखूबी समझते हैं ।

पढ़ाई लिखाई के लिहाज से देखें तो शाहरुख अपने समकालीनों की अपेक्षा ज्यादा इन्टेलीजेन्ट रहे हैं । दिल्ली के हंसराज कालेज से अर्थशास्त्र से ग्रेजुएट होने के अलावा वह जामिया मिल्लिया में मासकाम के स्टूडेंट भी रह चुके हैं । थियेटर और एन एस डी से भी उनका जुड़ाव रहा है । शाहरुख आज हर लिहाज से कामयाब हैं । उम्र की हाफ सेंचुरी बनाने के बाद भी उनके फैंस की संख्या बढ रही है । यही बात उनके बालीवुड में बादशाहत की तस्दीक करती है ।
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