शाहरूख का संसार केवल कैमरे की रोशनी में नहीं बसता, वह उन छोटे शहरों की आकांक्षाओं में भी है, जहां अब भी लोग मानते हैं कि लगन से तकदीर बदली जा सकती है। उन्होंने अभिनय को आकर्षण से आगे जाकर आत्मा की भाषा दी, कभी 'राज' बनकर मुस्कुराया, कभी 'चक दे' की पुकार में बदल गया। हर जन्मदिन पर चाहने वालों की भीड़ के आगे जब शाहरुख खड़े होते हैं, तब लगता है कि यह सिर्फ एक अभिनेता का जश्न नहीं, बल्कि उस सपने का उत्सव है, जो हर नौजवान के भीतर पलता है। शाहरुख खान इस अर्थ में एक व्यक्ति नहीं, एक प्रतीक हैं, इस देश की उस बेचैन ऊर्जा का, जो हार नहीं मानती, जो बार-बार उठती है और कहती है- 'पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त'।
शाहरुख खान
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संघर्ष में तपकर शुरु किया सफर
'किंग खान', 'बॉलीवुड के बादशाह', 'किंग ऑफ रोमांस' न जाने कितने ही नामों से शाहरुख खान को पुकारा जाता है। दिल्ली के इस लड़के के दीदार को मायानगरी में हर दिन लोगों की भीड़ जुटती है और जन्मदिन पर यह जनसैलाब का रूप ले लेती है। शाहरुख खान को सिनेमा की दुनिया में 33 साल हो गए हैं। उनकी पहली फिल्म 'दीवाना' (1992) सिनेमाघरों में लगी और दर्शक उनके दीवाने हो गए। फिर वे जुनूनी आशिक बने और इसके बाद यशराज फिल्म्स के साथ मिलकर रोमांस के किंग बनकर उभरे। मगर, शाहरुख के संघर्ष की शुरुआत उनके बड़े परदे पर आने से भी पहले हो चुकी थी। वे छोटे पर्दे से बड़े स्टार बने हैं। शाहरुख जब इंडस्ट्री में किस्मत चमकाने पहुंचे तो उन्हें कुछ भी थाली में परोस कर नहीं मिला। मायानगरी पहुंचने वाले हर आम नौजवान की तरह उन्हें संघर्ष करना पड़ा। रिजेक्शन झेलने पड़े, और तमाम प्रयासों के बाद शुरुआत टीवी से की। उन्होंने पहली बार 1988 में टीवी सीरीज 'दिल दरिया' में अभिनय किया। हालांकि, इसके निर्माण में देरी के कारण, उन्हें पहली बार 1989 की सीरीज 'फौजी' में छोटे पर्दे पर देखा गया।
दीवाना
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पहली ही फिल्म से चला दिया जादू
टेलीविजन पर पहली बार शाहरुख खान ने 'फौजी' में अभिमन्यु राय की भूमिका निभाई, जिसमें भारतीय सेना के जवानों के प्रशिक्षण पर चर्चा की गई थी। इसके बाद 'सर्कस' सीरीज में काम किया। शाहरुख 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में 'उम्मीद' और 'वागले की दुनिया' नामक लोकप्रिय धारावाहिकों का भी हिस्सा थे। फिर उन्होंने रुख किया बड़े परदे का। 1991 में शाहरुख हिंदी सिनेमा में बतौर अभिनेता अपना करियर बनाने के लिए दिल्ली से मुंबई चले गए। उन्होंने सबसे पहले हेमा मालिनी की निर्देशित पहली फिल्म 'दिल आशना है' की शूटिंग शुरू की, लेकिन 1992 में 'दीवाना' में नजर आए, जो आधिकारिक तौर पर उनकी पहली फिल्म थी। दिव्या भारती और ऋषि कपूर अभिनीत यह फिल्म सफल रही और शाहरुख को फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवार्ड मिला। 1992 में 'चमत्कार', 'दिल आशना है' और 'राजू बन गया जेंटलमैन' भी रिलीज हुईं। शाहरुख का करियर चल निकला था।
बाजीगर-डर
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एंटी हीरो इमेज से दर्शकों को चौंकाया
1990 के दशक की शुरुआत में शाहरुख खान ने एंटी हीरो के रोल अदा कर खूब तालियां बटोरीं। उनका यह अवतार काफी पसंद किया गया। शाहरुख खान ने 'बाजीगर' में एक प्रतिशोधी हत्यारे और 'डर' में एक पीछा करने वाले और जुनूनी आशिक की भूमिका निभाई। 'बाजीगर' ने शाहरुख खान को उनका पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया। 'डर', से शाहरुख खान का 'आई लव यू, कक्क-किरण' डायलॉग इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। इस नेगेटिव रोल के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड का नॉमिनेशन मिला था।
दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, कुछ कुछ होता है
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रोमांस के बादशाह बन दिलों पर किया राज
फिर शाहरुख के करियर में वह दौर आया, जिसने उनके खाते में सबसे ज्यादा फैंस दर्ज किए। उनकी छवि रोमांटिक हीरो के रूप में बनी और यशराज फिल्म्स व धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी फिल्मों ने इसे और मजबूत किया। एक एंटी हीरो से रोमांटिक हीरो बने शाहरुख खान दर्शकों के दिलों में और गहराई से उतरे। इस बार मामला ग्लोबल हो चला और दुनियाभर में उनकी दीवानगी बढ़ती गई। शाहरुख ने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (1995), दिल तो पागल है (1997), कुछ कुछ होता है (1998), मोहब्बतें (2000), कभी खुशी कभी गम (2001), कल हो ना हो (2003), वीर-जारा (2004), और कभी अलविदा ना कहना (2006) जैसी रोमांटिक फिल्मों के जरिए खुद को 'किंग ऑफ रोमांस' के रूप में स्थापित किया।
देवदास-स्वदेश-चक दे इंडिया
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'देवदास' और 'चक दे' जैसी फिल्मों में दिखा अलग अंदाज
शाहरुख खान का फिल्म 'देवदास' में अलग अंदाज देखने को मिला। शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित फिल्म 'देवदास' (1955) में दिलीप कुमार जैसे दिग्गज अभिनेता ने लीड रोल किया था। मगर, जब 2022 में शाहरुख खान ने यह किरदार निभाया तो तब भी बोल उठा। पारो की याद में शराब के नशे में चूर देवदास के रूप में शाहरुख को देख दर्शकों की आंखें भी नम हुईं। इसके अलावा उन्होंने 'स्वदेश' में नासा के वैज्ञानिक और 'चक दे' में हॉकी कोच की भूमिका में कुछ अलग तरह के प्रयोग किए और दर्शकों ने इस रूप में भी उन्हें खूब प्यार दिया।
चेन्नई एक्सप्रेस-रब ने बना दी जोड़ी
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रोमांटिक छवि को दिया विस्तार
कुछ किरदारों में प्रयोग के बाद शाहरुख खान एक बार फिर रोमांटिक किरदारों की तरफ लौटे। 'ओम शांति ओम' (2007), 'रब ने बना दी जोड़ी' (2008), 'चेन्नई एक्सप्रेस' (2013) और 'हैप्पी न्यू ईयर' (2014) की कमर्शियल सफलता ने उनके करियर को और विस्तार दिया। हालांकि, करियर की उड़ान में एक ब्रेक भी लगा और इसके बाद शाहरुख खान ने करियर से भी एक लंबा ब्रेक लिया। साल 2018 में आई 'जीरो' बॉक्स ऑफिस पर ठप रही। इसके बाद शाहरुख खान चार साल इंडस्ट्री से दूर रहे। हालांकि, इस बीच उन्होंने 'ब्रह्मास्त्र' और 'रॉकेट्री द नंबी इफैक्ट' में स्पेशल अपीयरेंस जरूर दी।
'पठान'-'जवान'-'डंकी'
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एक्शन हीरो की रूप में दमदार वापसी, लगाई हिट की हैट्रिक
फिर आया साल 2023। शाहरुख ने फिर साबित कर दिया कि उनकी बादशाहत कायम है। 'पठान' से उन्होंने वापसी की और कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए। इसी साल फिर आई 'जवान', जो 'पठान' से भी बढ़कर साबित हुई। इसके बाद 'डंकी' में भी डंका बजा। कमबैक के इस साल में शाहरुख खान ने बॉक्स ऑफिस पर हिट की हैट्रिक लगाई और बता दिया जमाने को कि जलवा कम नहीं हुआ है। शाहरुख खान अब अपनी आगामी फिल्म 'किंग' को लेकर चर्चा में हैं। यह फिल्म इस मायने में भी खास होगी कि उनकी बेटी सुहाना इसके जरिए बड़े परदे पर डेब्यू कर रही हैं।