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'हर कोई चाहता था कि मैं उसके बिस्तर तक आऊं'

Mon, 20 Jun 2016 03:28 PM IST
गीता टंडन/बीबीसी
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- फोटो : BBC
गीता टंडन वो नाम हैं, जो आज हर बड़ी हीरोइन के मुश्किल वक्त में काम आती हैं, उनके पर्दे पर दिखने वाले कठिन सीन करके। गीता आज जानी-मानी स्ट्ट वुमैन हैं। उनका ये सफर आसान नहीं रहा दो बच्चों की मां गीता की बेबसी का सबने फायदा उठाना चाहा। जानिए, गीता की कहानी उन्हीं की जुबानी।
स्टंट वुमन बन पाना तो एक सपने जैसा था। उससे पहले मुझे लगता था कि मेरी कोई औकात ही नहीं है। मैं ऐश्वर्या राय (जज्बा), करीना कपूर (उड़ता पंजाब, सिंघम रिटर्न्स), दीपिका पाडुकोण (चेन्नई एक्सप्रेस), परिणिती चोपड़ा (हंसी तो फंसी) जैसी हिरोईन की बॉडी-डबल बनी और खतरों के खिलाड़ी जैसे शो का हिस्सा भी। मैं बहुत गरीब घर से हूं। बड़ी मुश्किल से आठवीं तक की पढ़ाई की थी और दुनिया की कोई समझ भी नहीं थी। मैं नौ साल की थी जब मेरी मां गुजर गईं। मेरे पिता पर मेरे साथ मेरी बड़ी बहन और दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी थी।
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स्टंट वुमन गीता टंडन की कहानी

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- फोटो : BBC
अक्सर खाने को कुछ नहीं होता था। कई बार दो दिन तक लगातार भूखे रहना पड़ता था। ऐसे में क्या पढ़ाई होती? बस मैं खेलती खूब थी, वो भी लड़कों के साथ। लड़कों के खेल, जैसे गुल्ली डंडा और क्रिकेट। और ऐसा खेलती थी कि अपने से दो साल बड़े लड़कों को हरा देती थी। फिर 15 साल की उम्र में अचानक मेरे पिता ने मेरी शादी कर दी। मुझे भी लगा ठीक ही है, सर पर छत होगी, खाने को पूरा खाना और एक मां का प्यार। पर असल में शादी एक सजा बनकर रह गई। प्यार की जगह बस बदसलूकी और मार-पीट मिली। दो बार पुलिस में शिकायत तक की पर कुछ हासिल नहीं हुआ।
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स्टंट वुमन गीता टंडन की कहानी

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- फोटो : BBC
फिर 17 साल की उम्र में बेटी और दो साल बाद बेटा हुआ। लेकिन बच्चों के बाद भी माहौल नहीं बदला। आखिर मैंने तय किया कि मुझे ये जिंदगी नहीं जीनी और मैंने अपने बच्चों के साथ पति का घर छोड़ दिया। कभी बहन और कभी दोस्तों के घर में रही। कुछ दिन गुरुद्वारे में भी गुजारने पड़े। इसी दौरान पड़ोस की एक औरत ने मुझे एक फ्लैट में रहने का मौका दिया, कहा कि ये खाली पड़ा है। पर अगले ही दिन असली बात बताई। बोलीं, इस फ़्लैट के मालिक की पत्नी बीमार रहती है और वो चाहता है कि मैं वहीं रहने लगूं, उसका खयाल रखूं और बदले में वो मेरे बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च उठाएगा।

स्टंट वुमन गीता टंडन की कहानी

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- फोटो : BBC
मैं समझ गई कि वो आदमी मुझसे क्या चाहता है। मैंने फौरन वो फ्लैट छोड़ दिया। मैं वो औरत नहीं बनना चाहती थी जैसा समाज अक्सर अकेली या तलाकशुदा औरतों के बारे में सोचता है। मुझे याद थे मेरे पति के ताने जब वो कहता था कि मैं घर छोड़कर ऐसा क्या कर पाउंगी? आखिर में क्या 50 रुपए के लिए मुझे किसी का बिस्तर गर्म करना होगा?

मैं ऐसा नहीं कर सकती थी। पर सबसे बड़ी चुनौती काम ढूंढने की थी। बच्चों को अक़्सर पानी में चीनी घोल कर कहती थी कि ये दूध है। वो रोते-रोते पी लेते थे पर देखा नहीं जाता था। छोटा-मोटा हर काम ले लेती थी। एक जगह रोजाना 500 रोटियां बनाने के लिए महीने का 1,200 रुपया मिलता था, वो भी किया। फिर रहने का ठिकाना बदलते-बदलते एक नए इलाके में रहने लगी और औरतों के एक ग्रुप से वास्ता हुआ।
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स्टंट वुमन गीता टंडन की कहानी

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- फोटो : BBC
वो बहुत तैयार होकर रोज कहीं काम करने जाती थी, मैंने उनसे पूछा तो पता चला कि एक मसाज पार्लर जाती है। मैं भी उनके साथ हो ली। सास के सर की मालिश खूब की थी मैंने। और बताया गया कि महीने के 10,000 रुपए तक मिलेंगे। पर एक ही दिन में पता चल गया कि वहां भी मसाज की आड़ में दरअसल देह व्यापार होता है। मैं भाग खड़ी हुई। घर आकर बहुत रोई, ये सोच कर कि मैं ऐसा काम करने के कितने नजदीक आकर दूसरी बार बाल-बाल बच गई।
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स्टंट वुमन गीता टंडन की कहानी

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- फोटो : BBC
जिंदगी के इन कड़वे अनुभवों ने समझदार बना दिया मुझे। अपने पिता की मदद से शादी के फंक्शन में नाचने का काम ढूंढा और धीरे-धीरे दो पैसे कमाने लगी। वहीं दोस्त बने और उन्होंने देखा कि मैं नाचने के लिए नहीं बल्कि खेल-कूद और जांबाजी के कारनामों के लिए बनी हूं। शादी के ही एक प्रोग्राम में एक औरत का नंबर मिला जो स्टंट्स करवाती है और उन्हें दो महीने तक फोन कर काम मांगती रही। आखिरकार उन्होंने मुझे बिंदास चैनल के एक शो में एक किले से कूदने का स्टंट करने के लिए बुलाया। बस वहीं से मेरी जिंदगी पलट गई। उस दिन एक तार से बंधकर जब छलांग लगाई तो मन में चाहे जितना डर हो, चेहरे पर बहुत हौंसला था। उसी के बल पर काम मिलता चला गया। 
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सेक्स वर्कर नहीं, ये बनीं 'स्टंट वुमन'

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भारत में स्टंट करनेवाली औरतें बहुत कम हैं इसलिए मेरे काम की मांग थी और ये काम खतरनाक होने के बावजूद मुझे पैसों की जरूरत थी। स्टंट के दौरान एक बार चेहरा जल गया, एक और बार रीढ़ की हड्डी फ्रैकचर हुई। पर तीन महीने के बाद मैं कमर पर बेल्ट लगाकर फिर से काम पर निकल पड़ी। मुझे कार-चेज शूट करने में बहुत मजा आता है और मेरा सपना है कि मैं कोई हॉलीवुड-स्टाइल स्टंट करूं। मैंने कोई ट्रेनिंग नहीं ली, बस भगवान से और बच्चों से हिम्मत मिली। आज मेरे बच्चे मुझे हीरो मानते हैं और मुझे इस बात का गुरूर है कि मैंने अकेले अपने दम पर अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दी और अब उन्हें अंग्रेजी मीडियम के स्कूल में पढ़ा रही हूं।
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