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अमेरिकी सिनेमाघरों में दिखेगी गुजरात के पटेलों की कहानी

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अमरीका में भारतीय मूल के लोगों पर बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'मीट द पटेल्स' शुक्रवार को कई शहरों के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह फिल्म भारतीय मूल के दो निर्देशकों ने अपने ही पटेल परिवार पर बनाई है। यह पहला मौका है कि भारतीय मूल के लोगों पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री पूरे अमरीका के सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है।
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इस हास्य रोमांस फिल्म में निर्देशक भाई-बहन रवि पटेल और गीता पटेल ने पटेल समुदाय में युवाओं के विवाह को मुद्दा बनाया है। इसके मुख्य किरदार भी खुद रवि पटेल ही हैं। रवि पटेल बताते हैं कि उन्हें परिवार के भारत दौरे के बीच फिल्म का आइडिया आया।

रवि पटेल कहते हैं, 'हमारा पूरा परिवार एक बार गुजरात गया तो वहां सारे लोगों को यही चिंता थी कि मैं और मेरी बहन 30 साल की उम्र के बाद भी कुंवारे क्यों थे। सारे लोग आकर मुझसे और मेरे माता-पिता से पूछते कि क्या रिश्ते के लिए कोई लड़की देखनी है। मेरे माता-पिता का भी मन यही था कि वह किसी तरह गुजराती संस्कार वाली बहू ले आएं।'
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भारतीय मूल के लोगों में शादी को लेकर रहती है उथल-पुथल

रवि कहते हैं, 'मैं तो हाल ही में एक अमरीकी गर्लफ़्रेंड से रिश्ता टूटने के बाद विवाह की तो सोच भी नहीं रहा था, पर यह मेरे माता-पिता नहीं जानते थे। मेरी बहन इस सारे मंजर को अपने नए कैमरे में कैद कर रही थी। तब मुझे ख्याल आया कि क्यों न इस मुद्दे पर एक फिल्म ही बना दी जाए।'

रवि बताते हैं कि फिल्म का मकसद यह दिखाना है कि अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के परिवार में बच्चों की शादी को लेकर कितनी उथल-पुथल रहती है। वहीं, दूसरी ओर युवाओं की समस्या होती है कि वे माता पिता से खुलकर अपने दिल का हाल कैसे बयान करें।

रवि पटेल पेशे से अभिनेता हैं और कई अमरीकी टीवी सीरियल में काम कर चुके हैं। इस महीने भी उनका एक नया टीवी सीरियल 'ग्रैंडफादर्ड' शुरू हो रहा है। फिल्म की सह-निर्देशक गीता पटेल इससे पहले भी डॉक्यूमेंट्री बना चुकी हैं। इस फिल्म को तैयार होने में 5 साल लग गए।

'इसी बहाने संस्कृति के करीब आएंगे'

गीता पटेल बताती हैं, 'हमने कई चरणों में शूटिंग की जिसमें समय लगा। कई सीन एनिमेशन से दर्शाने और उसके लिए संगीत शामिल करने में भी दो साल का समय लग गया।' हास्य-व्यंग्य से भरपूर फिल्म में पटेल परिवार के गुजरात के दौरे के कई दृश्यों को ऐसे पेश किया गया है जिन पर हंसी रोकनी मुश्किल हो जाती है। फिल्म में अमरीका में बसे पटेल समुदाय और उसके तौर तरीकों पर भी दिल खोल कर टिप्पणी की गई है।

लेकिन रवि पटेल बताते हैं कि इसी बहाने उन्हें अपनी संस्कृति के और करीब आने का मौका मिला। फिल्म बनाने के दौरान उनके माता-पिता को यह भी नहीं पता था कि उनके बच्चे परिवार पर एक डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं।

माता-पिता समझ रहे थे कि बच्चे बस शौकिया वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं इसलिए फिल्म के दृश्य बहुत ही बेबाक लगते हैं। इसमें रवि पटेल के माता पिता का भी जाहिर है, बड़ा रोल है।
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माता-पिता को फिल्म पूरी होने को बाद पता चला

'कौन सी फिल्म' गीता पटेल बताती हैं कि जब फिल्म पूरी हो गई तो उन्होंने अपने माता-पिता को डीवीडी पकड़ाई और कहा, 'हम लोगों की फिल्म तैयार हो गई।' तो उनके माता पिता ने पूछा, 'कौन सी फिल्म?'

रवि पटेल के पिता 1960 के दशक में ही भारत से अमरीका आ गए थे। जहां उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इस फिल्म 'मीट द पटेल्ज' को अमरीका में कई फिल्मोत्सवों में पुरस्कार भी मिल चुके हैं। फिल्म को अमेरिका में कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा इसके लिए तो कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा।
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