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Ground Zero: ‘जो गोलियां पेट में लगीं, आज तक..’, नरेंद्र नाथ धर दुबे ने सुनाई वो कहानी जिस पर बनी ग्राउंड जीरो

Mon, 28 Apr 2025 07:04 PM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Amar Ujala Samwad 2025: साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आयोजन 17-18 अप्रेल को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ था। इस दौरान पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे ने गाजी बाबा एनकाउंटर मिशन की पूरी कहानी सुनाई थी। 
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नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इमरान हाशमी की फिल्म 'ग्राउंड जीरो' रिलीज हो चुकी है। फिल्म में इमरान ने बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे की भूमिका निभाई है, जिन्होंने कश्मीर में गाजी बाबा का एनकाउंटर किया था। ये मिशन कैसे पूरा हुआ और इस दौरान क्या-क्या परेशानियां आईं? इस बारे में नरेंद्र नाथ ने अमर उजाला के कार्यक्रम संवाद में बताया था। जानिए उस पूरे मिशन की कहानी नरेंद्र नाथ धर दुबे की जुबानी...

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फिल्म 'ग्राउंड जीरो' में इमरान हाशमी ने नरेंद्र नाथ धर दुबे का किरदार निभाया है - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बॉडी में लगीं सात गोलियां
मिशन की बात करते हुए नरेंद्र नाथ धर दुबे ने बताया, 'उस ऑपरेशन में मेरा दाहिना हाथ बिलकुल सुन्न हो गया था तो गोली कितनी लगीं उस समय तो पता नहीं चला। मैं हॉस्पिटल गया, मेरी सर्जरी हुई और जब अगले दिन एनेस्थीसिया से मेरी नींद खुली तो लेटे-लेटे मैं अपनी बॉडी देख रहा था। डॉक्टर ने बताया की आपक बॉडी को सात बुलेट्स शॉट्स लगे। बॉडी में वो सात गोलियां कहां लगीं उसके बारे में अभी भी पता नहीं चला।'

पेट के अंदर में आज भी हैं गोलियां
गोलियों के बारे में बताते हुए नरेंद्र नाथ धर दुबे ने कहा कि एक गोली पेट में लगी तो वो मिली नहीं। वो क्रॉस होकर बाहर ही नहीं निकली तो पता ही नहीं चला कि वो अंदर कहां खो गई। अभी भी वो खोई हुई ही है। इसके अलावा दाहिने पैर में गोली लगी तो उसने भी हड्डी फ्रैक्चर नहीं किया, तो उसका भी पता नहीं चला। मुझे तो जो टांके लगे थे उससे पता चला की गोली लगी है।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
छाती पर भी लगीं तीन गोलियां
नरेंद्र आगे बताते हैं, 'बाईं छाती में करीब जो तीन गोलियां लगी थीं, वो डायरेक्टर जनरल कमेंडेशन की वन बाय की स्टील प्लेट होती है तो उसने वो सभी गोलियों को क्रश कर दिया था। वहां भी सिर्फ टांके ही लगे। वो हमारे घर में अभी भी हमारे पास है। मेरी किस्मत अच्छी थी।
इंजरी की पूरा डिटेल हमें अगले दिन हॉस्पिटल में पता चली क्योंकि जब आप हॉट एनकाउंटर सिचुएशन में होते हैं तो आप उस समय जो महसूस करते हैं तो आपको कुछ पता नहीं चलता। मुझे मेरे घायल होने का पूरा डेटा डॉक्टर से पता चला।'

कैसा रहा मिशन से पहले का माहौल
नरेंद्र नाथ धर दुबे ने आगे कहा कि मेरा हॉस्पिटलाइजेशन बहुत लंबा रहा। मैं 19 दिसंबर 2007 को एम्स से डिस्चार्ज हुआ। बीच-बीच में मैं कुछ समय के लिए भी डिस्चार्ज होता था। एक ही कैलेंडर ईयर में मेरी तीन सर्जरी हुई। ये एनकाउंटर मौत से हाथ मिलाने वाला था। आप जा रहे हैं और आपको पता है कि गाजी बाबा का हेड आउट है और वो 17 महीने से कश्मीर घाटी में भाग रहा है। संसद में हमला करने का इतना बड़ा क्राइम उसके सिर पर है और पक्की खबर है कि वो वहां है और उसका डिप्टी चीफ अपने कब्जे में है तो पता है ही कि ये होगा, क्योंकि कुछ तो कीमत तो चुकानी पड़ेगी और ऐसा हुआ भी। इस पूरे मिशन में हमारे एक साथी बलवीर सिंह की शहादत हो गई, उसको हम बचा नहीं पाए, इसका हमें बहुत दुख है।
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डीजीपी ने आईसीयू में दी बधाई
मिशन के बाद की जिंदगी के बारे में बात करते हुए नरेंद्र नाथ धर दुबे ने कहा कि बाद में आईसीयू में डीजीपी ने मुझे बधाई दी। जब मैं होश में आया तो डायरेक्टर जनरल बीएसएफ, कमांडर, मेरी पत्नी और अन्य लोग मुझे गेट पर दिखे और तब मुझे डीजीपी ने कहा कि हमने डॉक्टर से बात की और आप गंभीर तरीके से घायल हैं, लेकिन जिंदगी बच जाएगी, बात कर ली है मैंने।
फिर उन्होंने मुझे बधाई थी, तब मुझे समझ नहीं आया कि किस बात की बधाई है तो उन्होंने कहा कि गाजी बाबा अब इतिहास बन चुका है। जब मैंने बाकी साथियों की खबर सुनी तो तब तकलीफ थोड़ी कम हुई।

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