अमित ने याद किए संघर्ष के दिन
अमर उजाला संवाद में अमित सियाल ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उस वक्त का संघर्ष उन्हें अंतहीन लगता था। इस दौरान उन्होंने कहा, 'मैं कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता। कानपुर में निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुआ। बचपन में ऐसा लगता था कि बाप रे, ये संघर्ष कब खत्म होगा? मैं कब बड़ा होऊंगा और इन मुश्किलों से छुटकारा पाऊंगा? लेकिन अब भी वैसा ही लगता है। मुझे लगता है कि संघर्ष जिंदगी का हिस्सा है और ये हमेशा चलता रहता है।'
संघर्ष से आगे बढ़ चुनी एक्टिंग की राह
अमित ने आगे कहा कि उनके लिए संघर्ष कोई बोझ नहीं, बल्कि एक ऐसी ताकत है, जो इंसान को आगे बढ़ाती है। थमा हुआ पानी हमेशा बेकार होता है। संघर्ष ही आपको बढ़ाता है। अगर आप रुक गए तो जिंदगी भी रुक जाएगी। अमित ने खुलासा किया कि 30 साल की उम्र तक वह पूरी तरह खोए हुए थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि जिंदगी में करना क्या है, लेकिन तभी उन्हें अपने भीतर की आवाज सुनाई दी, जो कह रही थी कि एक्टिंग ही उनका असली रास्ता है। उन्होंने कहा कि “मैंने ठान लिया कि एक्टर ही बनूंगा। चाहे दिन में एक रोटी खाऊं या वो भी न खाऊं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। बस एक्टिंग करनी है।
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अब संघर्ष महसूस नहीं होता...
अमित का मानना है कि हर इंसान के जीवन में संघर्ष एक जैसा ही होता है। उन्होंने कहा, 'ऐसी कोई चीज नहीं, जिसमें मैंने संघर्ष किया और आप में से किसी ने न किया हो। मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ अलग किया है। सबसे बड़ा संघर्ष यही है कि मुझे करना क्या है? अब संघर्ष कोई बड़ी बात नहीं, क्योंकि मकसद मिल चुका है। अब मुझे संघर्ष महसूस ही नहीं होता। जो चीज मुझे करनी थी, वो मिल गई। अब जो हैं, वो तो रोजमर्रा की छोटी-मोटी मुश्किलें हैं। इनसे तो आप निकल ही जाओगे।'
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संघर्ष ही दिखाएंगे रास्ता
अमित ने जिंदगी को एक अनोखे नजरिए से देखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अपनी लाइफ को अप्रिशिएट करो। एक दिन जिंदगी बदलेगी, अच्छा वक्त जरूर आएगा। यूनिवर्स का विस्तार होता है, हमें भी विस्तार करते रहना चाहिए। जब भी जिंदगी में डाउन फील करो, डिस्कवरी चैनल पर शो देखो। हम समुद्र के एक कण जितने भी नहीं हैं। संघर्ष को भी एंजॉय करो। संघर्ष को गले लगाओ, क्योंकि यही तुम्हें तुम्हारा रास्ता दिखाएगा।