एआई को खतरा नहीं मानते समीर अंजान
आज एआई हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, संगीत जगत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। कुछ लोग इसे एक खतरे की तरह देख रहे हैं। लेकिन समीर अंजान इसके अलग सोचते रखते हैं। वह एआई को खतरा नहीं मानते हैं। वह कहते हैं, ‘देखिए, जो हमने लिख दिया है, उसमें एआई बदलाव कर सकता है, उसका म्यूजिक और शब्द बदल सकता है। लेकिन जो हमने लिखा ही नहीं है, जो हमें दिया ही नहीं, उसे एआई कहां से लेकर आएगा। किसी ने खूब कहा है कि एआई ने कभी इश्क किया नहीं, उसका कभी दिल टूटा नहीं। आखिर फिर एआई इमोशंस को कहां से लाएगा।’
अपना देखा और जिया ही लिखते हैं
समीर अंजान कहते हैं कि हर राइटर अपने दौर और आसपास की परिस्थितियों, कल्चर के हिसाब से काम करता है। हर राइटर अपना जिया हुआ ही लिखता है। वह कहते हैं, ‘हमारे पिता ने हमारी मां का चेहरा शादी वाले दिन देखा था, वो भी हल्की रोशनी में। लेकिन मेरी पीढ़ी ने ऐसा नहीं किया। मेरा मानना है कि बात लफ्जों की नहीं इमोशंस की है। साथ ही इसके पीछे आपका जीवनदर्शन क्या है, यह मायने रखता है। इसलिए मैं कहता हूं पहले चीजों को जियो, इश्क करो। दुनिया देखो, दर्द महसूस करो। क्रिएटिव लोगों को आम आदमी के आसपास रहना चाहिए, मैं आज भी लोकल ट्रेन, ऑटो में चल जाता हूं। मैं देखना चाहता हूं कि ये लोग कैसे बात कर रहे हैं, क्या महसूस कर रहे हैं। यह सब देखकर ही रूह पर असर पड़ता है। तब आपके अंदर से जो गीत निकलते हैं, उससे आम लोग रिलेट कर पाते हैं। तब लोग कहते हैं कि ये गीतकार तो मेरे दर्द की बात कह रहा है।’
जब गाना सुनकर अंडरवर्ल्ड से आया फोन
समीर अंजान अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताते हैं, ‘एक बार सुबह चार बजे अंडरवर्ल्ड से फोन आया। सामने फोन पर एक आदमी शराब पीकर खूब रो रहा है। वह बोला कि सर आपने दो लाइन में मेरी पूरी जिंदगी लिख दी। वो गाना था, ‘जिंदगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए, जब यह सोचा तो घबरा गए, हम कहां थे, कहां आ गए।’ यह तो किसी अंडरवर्ल्ड की जिंदगी की सच्चाई है। मैंने भी जब जीवन में अभाव देखा, तो मेरी कलम से अपना जिया हुआ ही लिखा गया।’