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सलमान बदल देंगे 'ट्यूबलाइट' की कहानी!

Wed, 24 Aug 2016 10:35 AM IST
रवि बुले/ मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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- फोटो : Twitter
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सलमान खान स्टारर अगली फिल्म ट्यूबलाइट को लेकर लंबे समय से चर्चा थी कि वह भारत-चीन युद्ध (1962) की पृष्ठभूमि पर आधारित है परंतु अचानक यह बात सामने आ रही है कि इसका कथानक हॉलीवुड फिल्म लिटिल बॉय से प्रेरित है। फर्क इतना है कि हॉलीवुड फिल्म में पिता-पुत्र की कहानी है और ट्यूबलाइट में दो भाइयों की।
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इस बात के सामने आते ही बताया जा रहा है कि निर्देशक कबीर खान और उनके राइटरों की टीम स्क्रिप्ट में नए जोड़-घटाव में जुट गए हैं। जिससे दोनों फिल्मों में दिखने वाली समानताएं खत्म हो जाएं और आलोचकों को कोई मौका न मिले। हालांकि निर्माताओं की ओर से फिल्म के कथानक को लेकर किसी तरह की बात नहीं कही गई है परंतु चर्चाओं का बाजार गर्म है।

ट्यूबलाइट में सलमान और सोहेल खान निजी जिंदगी की तरह सगे भाइयों की भूमिका में हैं। जो युद्ध में भाग लेते हैं। लिटिल बॉय एक युद्ध का फंतासी ड्रामा है, जिसमें एक बच्चा अपने युद्ध में गए पिता को वापस लाना चाहता है। युद्ध में उसके पिता खो गए हैं।
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लद्दाख में चल रही है फिल्म की शूटिंग

- फोटो : Twitter
बच्चे को स्थानीय पादरी समझाता है कि अगर उसकी इच्छाशक्ति और घटनाओं को बदलने की शक्ति में विश्वास है तो वह पिता को लौटा सकता है। बच्चा चुनौती को स्वीकार करता है और युद्ध का नतीजा बदलने और पिता को खोजने निकल पड़ता है। चर्चा है कि ट्यूबलाइट में सलमान का किरदार इसी बच्चे से प्रेरित है।

जैसे बच्चा पिता लौटाने के लिए पूरे विश्वास से युद्धग्रस्त मैदान में उतर पड़ता है वैसे ही सलमान भी चीन की धरती पर कदम रखेंगे ताकि युद्ध में खोए अपने भाई को लौटा कर घर ला सकें। चीन में ही उनकी मुलाकात एक लड़की से होती है, जिससे रोमांस होता है। चीनी अभिनेत्री झू झू यह रोल निभा रही हैं।

इन दिनों फिल्म की शूटिंग लद्दाख में जारी है। इसकी यूनिट में दो सौ लोग शामिल हैं। एक था टाइगर और बजरंगी भाईजान के बाद कबीर-सलमान की जोड़ी की यह तीसरी फिल्म होगी। इसे ईद 2017 में रिलीज किया जाएगा। फिल्मों में भारत-चीन के रिश्तों का दिखना नया नहीं है, ये सिलसिला बहुत पुराना है।
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बॉलावुड फिल्मों में भारत और चीन

डॉ.कोटसीन की अमर कहानी (1946)
निर्माता-निर्देशक-अभिनेता वी.शांताराम की यह फिल्म डॉ.द्वारकानाथ कोटनीस के जीवन पर आधारित है। जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान में चीनी सैनिकों के इलाज के लिए गए थे। वहीं चीनी युवती से उन्हें प्रेम हुआ और उन्होंने विवाह किया। उन दिनों युद्ध भूमि में प्लेग फैला था। 32 वर्ष की आयु में डॉ.कोटनीस चीनी सैनिकों का इलाज करते हुए प्लेग के शिकार हो गए।

नील आकाशेर नीचे (1959)
-ब्रिटिश राज के आखिरी दिनों में कोलकाता की कहानी कहने वाली निर्देशक मृणाल सेन की इस फिल्म में एक प्रवासी चीनी मजदूर और भारतीय युवती की कहानी थी। फिल्म में कई राजनीतिक संकेत थे। भारत सरकार ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी। स्वतंत्र भारत में बैन होने वाली यह पहली फिल्म थी। बैन दो साल तक रहा।

हकीकत (1964)
भारत-चीन युद्ध दिखाने वाली इस फिल्म का निर्माण चेतन आनंद ने किया। यह एक छोटी भारतीय प्लाटून के चीन के विरुद्ध डट कर लड़ने की दास्तान है। किन संकटों और समस्याओं के बीच चीन की विशाल सेना का हमारे सैनिकों ने मुकाबला किया और शहीद हुए। इसमें मोहम्मद रफी का गाया कर चले हम फिदा... गाना अमर है।

हावड़ा ब्रिज, प्रेम पुजारी
1950 से 1970 के दशक में अक्सर फिल्मों में चीन से संबंधित किरदार/घटनाए नकारात्मक रोशनी में आए। चीनी किरदार तस्कर और गैंगस्टर दिखते रहे। वह देश पर खतरे के रूप में पर्दे पर आए। मधुबाला-आशोक कुमार की हावड़ा ब्रिज और देव आनंद की प्रेम पुजारी ऐसी ही फिल्में हैं। हावड़ा ब्रिज का गाना मेरा नाम चिन चिन चु आज भी लोकप्रिय है।

चांदनी चौक टू चाइना (2009)
करीब चार दशक बाद कथानकों में भारत-चीन रिश्तों को बदलने की कोशिश अक्षय कुमार-दीपिका पादुकोण स्टारर में हुई। यह एक कॉमेडी थी। पहली बॉलीवुड फिल्म, जो चीन में शूट हुई। फिल्म में राजनीतिक टोन नहीं था, मगर विलेन चीनी था। फिल्म में चीन की संस्कृति और खूबसूरती को दिखाया गया था। यहां हीरोइन की मां भारतीय और पिता चीनी थे। हीरो पूर्व जन्म में चीनी दिखाया गया।
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