सलमान खान देश में ओलंपिक खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सीधे इस आयोजन से जुड़ गए हैं। वह भारत के ओलंपिक सद्भावना दूत हैं। ऐसा करके उन्होंने एक तीर से दो निशाने लगाए हैं। चर्चा का बाजार गर्म है कि सुल्तान में सलमान ओलंपिक में कुश्ती का स्वर्ण पदक जीतते नजर आएंगे।
पिछले दिनों सलमान खान को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा रियो ओलंपिक के लिए सद्भावना दूत बनाने पर अच्छा खासा विवाद हुआ। आरोप लगे कि यह सलमान की आने वाली फिल्म सुल्तान के प्रमोशन का ही हिस्सा है। परंतु सलमान और आईओए ने इस पर अपने-अपने पक्ष रख दिए। मगर अब बताया जाता है कि इस गठजोड़ की असली वजह यह है कि सुल्तान के अंत में सलमान ओलंपिक खेलों में चैंपियन बनते दिखाई देंगे!!
सलमान की फिल्म जुलाई में रिलीज होनी है और रियो डि जिनेरियो (ब्राजील) ओलंपिक पांच से 21 अगस्त तक होंगे। ऐसे में साफ है कि ओलंपिक की गूंज का फायदा सलमान और भारतीय ओलंपिक संघ दोनों ही उठाना चाहते हैं। सुल्तान एक स्पोर्ट्स फिल्म है और आम तौर पर ऐसी फिल्में खिलाड़ी की विजय के साथ तिरंगे को फहराते हुए समाप्त होती हैं। सलमान अपनी फिल्म के आखिर में ओलंपिक में तिरंगा लहराएंगे।
सलमान ने फिल्म को ओलंपिक से जोड़ मास्टर स्ट्रोक लगाया
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इंडस्ट्री में फिल्म की कहानी को लेकर चर्चाएं हैं। सलमान फिल्म में हरियाणा के पहलवान सुल्तान अली खान बने हैं। वहीं हीरोइन अनुष्का शर्मा भी रेसलर हैं जिनसे सुल्तान को प्यार है। यह प्रेम जब रूमानी रास्तों पर आगे बढ़ रहा होता है तभी सुल्तान के जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो आरफा (अनुष्का शर्मा) को उससे नाराज कर देती है। सुल्तान के कुछ काम उसकी छवि लोगों के मन में खराब कर देते है। इन घटनाओं का असर उसके खेल करिअर पर भी पड़ता है और वह कुश्ती से दूर हो जाता है। मगर कुछ समय बाद सुल्तान को समझ आता है कि कुश्ती ही उसका जीवन है और उसे अपने अंदर की कमियों को इस खेल से हराना है। सुल्तान फिर अखाड़े में लौटता है और जी-जान से चैंपियन बनने में जुट जाता है। अंत में वह ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल करता है।
सुल्तान पूरी तरह से सलमान की कामयाब फिल्मों की तर्ज पर गढ़ी गई कहानी है। जिसमें रोमांस, ऐक्शन और देशभक्ति का पूरा ड्रामा है। आलोचक इस बात पर हैरान थे कि अचानक सलमान ओलंपिक पर क्यों लोगों को जागरूक बनाने के लिए उठ खड़े हुए? सुल्तान की कहानी में उन्हें जवाब मिल सकता है। आईओए पहले ही साफ कर चुका है कि उसने सलमान को सद्भावना दूत बनने के लिए अपनी तरफ से पहल नहीं की थी बल्कि सलमान ने ही ओलंपिक खेलों को भारत में और चर्चा दिलाने के लिहाज से सद्भावना दूत बनाने के लिए एप्रोच किया था।
सलमान का तर्क है, ‘ओलंपिक को हमारे यहां क्रिकेट की तरह दर्शक नहीं मिलते क्योंकि हम दूसरे खेलों को देखते ही नहीं। जब ओलंपिक में एक ही समय में कई खेल दिखेंगे तो लोगों की उनमें सहज ही दिलचस्पी पैदा हो जाएगी। तब वे हमारे यहां भी उन्हें देखने के लिए स्टेडियम में पहुंचेंगे।’ क्या वाकई ऐसा होगा? यह तो समय बताएगा, परंतु इतना तय है कि सलमान ने अपनी फिल्म को ओलंपिक से जोड़ कर मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है।