निर्देशक मीरा नायर की फिल्म 'सलाम बॉम्बे' 22 मार्च को फिर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जा रही है। नायर इस बात से काफी रोमांचित हैं। प्रश्न इस बात का है कि इस फिल्म को दोबारा रिलीज करने की वजह क्या हैं। क्या वह समस्याएं और मुद्दे जस के तस बने हुए हैं जो 1998 में रिलीज हुई इस फिल्म के जरिए उठाए गए थे। क्या मीरा नायर इसी बात को फिर से दिखाना चाहती हैं।
'सलाम बॉम्बे' 1998 में पहली बार प्रदर्शित हुई थी और ऑस्कर के लिए नामांकित की गई थी। नायर ने एक बयान में कहा, "सलाम बॉम्बे' का दोबारा प्रदर्शन बहुत रोमांचकारी है। नई पीढ़ी के युवाओं के समक्ष फिल्म का दोबारा दिखाया जाना ऐसा है जैसे फिल्म की कहानी अब भी उतना ही ताजा है।"
फिल्म मुम्बई के रेड लाइट एरिया की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म में सड़कों पर बसर करने वाले बच्चों की दिनचर्या और जीवनशैली, नशे का व्यापार करने वाले बिचौलियों और वेश्यावृति में फंसी महिलाओं की जिंदगियों का चित्रण किया गया है।
फिल्म के कलाकार मुम्बई की सड़कों पर जीवन जीने वाले बच्चे और वेश्यावृति करने वाली महिलाएं हैं। बॉलीवुड के नामी कलाकार शफीक सैय्यद, इरफान, रघुवीर यादव, नाना पाटेकर, चंदा शर्मा और अनिता कंवर ने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
'सलाम बॉम्बे' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के नेशनल फिल्म फेस्टीवल पुरस्कार सहित कांस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल में कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पीवीआर लिमिटेड के सहायक प्रबंध महानिदेशक संजीव कुमार बिजली ने कहा, "मीरा ने मुम्बई जैसे शहर की जीवनशैली का बिल्कुल सही चित्रण किया है। उन्होंने सड़कों पर बसर करने वाले बच्चों और दूसरे तबकों के संघर्ष को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है।"
'सलाम बॉम्बे' को दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, बंगलुरू, पुणे और गुड़गांव के पीवीआर सिनेमा और सिनेमैक्स में प्रदर्शित किया जाएगा। इस फिल्म के साथ 22 मार्च को ही दो नयी फिल्में 'आत्मा' और 'रंगरेज' भी रिलीज होंगी।