एस. नंबी नारायणन
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फिल्म की कहानी एक ऐसे वैज्ञानिक की है जिसे जासूस घोषित कर दिया गया। 24 साल वो इसके खिलाफ लड़ता रहा और उसे इंसाफ मिलने में दो दशक से ज्यादा का समय लग गया। आर माधवन की इस फिल्म में आपको वो सब देखने को मिलेगा जो नंबी नारायणन की जिंदगी में घटा है।
इन पर बन रही है फिल्म
एस. नंबी नारायणन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में क्रायोजेनिक्स डिपार्टमेंट में इंचार्ज थे। नंबी 1970 के समय से लिक्विड फ्यूल वाले इंजनों के क्षेत्र में काम कर रहे थे जो आगे चलकर भारत को बहुत फायदा पहुंचाते। लेकिन 1994 में नंबी को जासूसी के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। नंबी और उनके साथियों पर पाकिस्तान को इसरो रॉकेट इंजन की सीक्रेट जानकारी और अन्य जानकारी दूसरे देशों को देने के आरोप थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने नारायणन से पूछताछ शुरू की। हालांकि नारायणन ने आरोपों का खंडन किया और इसे गलत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा इस मामले की फिर से जांच के आदेश को खारिज कर दिया और कोर्ट ने 1998 में उन्हें दोषों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि नंबी नारायण को गिरफ्तार किया जाना गैरजरूरी था, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 14 सितंबर 2018 को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट ने उत्पीड़न का शिकार हुए इसरो वैज्ञानिक नारायणन को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में एक जूडिशल जांच का भी आदेश दिया।
बता दें सिबी मैथ्यू वो अफसर हैं, जिन्होंने इस जासूसी कांड की जांच की थी। CBI ने भी अपनी रिपोर्ट में नंबी की गिरफ्तारी के लिए इन्हीं अफसरों को जिम्मेदार ठहराया था।