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RK/RKay Movie Review: बड़े पर्दे पर वापसी की मल्लिका की एक और कोशिश, तुक तो मिला नहीं दर्शक मिलने भी मुश्किल

Wed, 20 Jul 2022 05:26 PM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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आरके फिल्म - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
आर के/आरके
कलाकार
रजत कपूर , मल्लिका शेरावत , कुब्रा सैत , रणवीर शौरी , मनु ऋषि चड्ढा और आदि
लेखक
रजत कपूर
निर्देशक
रजत कपूर
निर्माता
मिथ्या टाकीज और प्रियांशी फिल्म्स
रिलीज
22 जुलाई 2022
रेटिंग
1.5/5

लेखक, निर्माता, निर्देशक और अभिनेता रजत कपूर की पहचान एक ऐसे फिल्मकार की रही है जिसने सिनेमा को एक अलग नजरिये से देखा। एक तरफ जहां बड़े बड़े स्टार और मेकर कमर्शियल सिनेमा को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीँ रजत कपूर ने समान्तर सिनेमा के आस्तित्व को बचाए रखा और इसे हल्के फुल्के अंदाज में दर्शको को परोसा। हालांकि, ऐसी फिल्मों के निर्माण में बहुत कम लोग ही दिलचस्पी दिखाते हैं लेकिन एक अलग सोचने वाले फिल्मकार के अंदर ही ऐसा जूनून होता है कि किसी भी तरह अपनी फिल्म को बना ही लेता है। इस हफ्ते रिलीज हो रही रजत कपूर की फिल्म ‘आर के /आरके’ क्राउडफंडिंग से बनी है। इससे पहले भी रजत कपूर ने फिल्म ‘रघु रोमियो’ का निर्माण अपने दोस्तों की मदद से किया था। 

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आरके फिल्म - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कहानी एक निर्देशक की
‘आर के/आरके’ की कहानी एक ऐसे निर्देशक की है जो फिल्म में खुद हीरो का पात्र निभाता है। शूटिंग के बाद जब फिल्म एडिटिंग टेबल पर आती है, तो पता चलता है कि फिल्म का हीरो महबूब रील से गायब है। फिर उसको ढूंढने  की कोशिश की जाती है, यहां तक उसकी गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में भी  दर्ज करा दी जाती है। स्थितियां यहां पर बड़ी हास्यास्पद लगती हैं कि कैसे फिल्म का हीरो रील से गायब हो जाता है और उसे एक आम इंसान की तरह ढूंढा जाता है। फिर किस तरह से महबूब मिलता और फिल्म पूरी होकर थियेटर में रिलीज होती है, यही फिल्म ‘आर के/आरके’ की कहानी है। 

आरके फिल्म में मल्लिका शेरावत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सिनेमाई भ्रमजाल में उलझी फिल्म
फिल्म ‘आर के/आरके’ की कहानी पचास के दशक के की है। रजत कपूर ने उस दौर को फिल्म में बहुत अच्छी तरह से पेश भी किया, चाहे वो लोकेशन हो, मेकअप या फिर कॉस्ट्यूम। लेकिन शायद वह भूल गए कि उस दौर में शूटिंग के दौरान मॉनीटर नहीं रहता था और जब मॉनिटर रख ही लिया तो पटकथा में ये ध्यान रखना चाहिए था कि शूटिंग करते समय कम से कम एक बार मॉनिटर में चेक कर लें कि शूटिंग ठीक से हो रही है कि नहीं। इसी के चलते कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट कि एडिटिंग टेबल पर फिल्म के सभी पात्र नजर आते है सिवाय महबूब के, फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी बन जाता है। यहीं नहीं फिल्म ‘आर के/आरके’ की कहानी के मुताबिक फिल्म की एडिटिंग डिजिटल मशीन पर हो रही है, जब कि उस दौर में डिजिटल का जमाना था ही नहीं तब एनालॉग एडिटिंग होती थी, और बहुत बाद में मोविओला मशीन आई।

आरके फिल्म में मल्लिका शेरावत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मल्लिका शेरावत की अच्छी कोशिश
रजत कपूर फिल्म फिल्म ‘आर के/आरके’ की कहानी लिखते वक्त शायद भूल गए कि ऐसी कहानी कहनी है, जो दर्शकों को आसानी से समझ में आ जाए। कहानी ऐसी है कि सिर्फ इसे बनाने वाले ही समझ सकते हैं। विषय उन्होंने अच्छा चुना है, लेकिन विषय को जिस तरह से आम दर्शकों के लिए पेश किया जाना चाहिए, वैसा रजत कर पाए। दावा यही रहा है कि ये फिल्म बहुत सारे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सराही गई गई। लेकिन फिल्म अगर फेस्टिवल के लिए ही बनी है तो ठीक है पर आम दर्शकों के लिए कहानी को समझना आसान नहीं है। रजत कपूर इस फिल्म में डबल रोल में है। दोनों किरदार उन्होंने बड़ी शिद्दत के साथ निभाने की कोशिश की है, लेकिन उनके अभिनय की अपनी सीमाएं हैं। गुलाबो की भूमिका में मल्लिका शेरावत ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय करने की कोशिश की है। किरदार है भी उनके करियर का अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार। फिल्म निर्माता की भूमिका में मनु ऋषि चड्ढा और रजत कपूर की पत्नी की भूमिका में कुब्रा सैत ठीक लगी हैं।
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आरके फिल्म में मल्लिका शेरावत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

देखें कि न देखें
किसी फिल्म की पृष्भूमि अगर पचास के दशक हो तो उसमें आर्ट डायेरक्टर की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में आर्ट डायरेकटर निखिल हंसोरा ने फिल्म ‘आर के/आरके’ में अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है। कथा, पटकथा, निर्देशन में चूकी इस फिल्म में रफेली मेहमूद की सिनेमैटोग्राफी, सुरेश पाई का संपादन अच्छा है। ऐसी फिल्मों में कॉस्टयूम  और मेकअप डिपार्टमेंट के काम को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। कॉस्ट्यूम डिजाइनर नीलांचल घोष, दर्शन जालान और अंतरा बहुगुणा घोष का मेकअप काबिले तारीफ है, हालांकि फिल्म का संगीत फिल्म देखकर निकलने के बाद अपना असर कायम नहीं रख पाता है। फिल्म में मनोरंजन के तत्व की कमी आखिर तक खलती है और अधिकतर दर्शकों के लिए ये ओटीटी पर देखना ही बेहतर रहेगा।

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