रिदम कला महोत्सव का आगाज हो चुका है। अंजना वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में संगीत एवं नृत्य की कार्यशालाओं का प्रबंधन किया गया है। युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से इस महोत्सव को बीते 8 सालों से आयोजित किया जा रहा है। 26 जनवरी से शुरू हुआ कला महोत्सव 45 दिन तक आयोजित किया जाएगा।
सवाल: ऋषि मिश्रा जी, आप बनारस घराने की संगीत परंपरा से जुड़े हुए हैं। आपके घर में ही इतना महान गायक रहे हैं। ऐसे में आपने संगीत की तालीम कहां से ली? आपने पहली बार जब संगीत सीखना शुरू किया तब आप कितने साल के रहे होंगे?
जवाब: मेरा ताल्लुक घराने से रहा है। घराने में हमेशा से गुरु-शिष्य की परंपरा रही है। मेरे गुरु और मेरे दादा जी पंडित गणेश प्रसाद मिश्र जी और मेरे पिताजी पंडित विद्याधर मिश्रा जी (अलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगी विभाग के अध्यक्ष) घर पर ही अपने शिष्यों को संगीत की तालीम दिया करते थे। उस तालीम के अंतर्गत उनके द्वारा दी जाने वाली शिक्षा मेरे कानों में पड़ती थी। इसलिए मैं कहता हूं कि मेरे जन्म से ही मेरी शिक्षा आरंभ हो गई थी।
सवाल: पंडित इमान दास जी, आपके गुरु प्रसिद्ध गीतकार और संगीतकार पंडित अजय चक्रवर्ती जी रहे हैं। आपकी संगीत की तालीम का सफर किस तरह शुरू हुआ?
जवाब: जी,17-18 साल की उम्र में मेरे गुरु पंडित अजय चक्रवर्ती जी संगीत की तालीम ली थी। मेरे सौभाग्य रहा कि मैंने अपने जीवनकाल में पंडित शांतनु भट्टाचार्य जी और पंडित सत्यान बाक्शी जी से संगीत भी सीखा। आज 20 साल हो गए हैं, गाते-गाते। लेकिन आज भी उम्र वही सीखने वाली ही है।
सवाल: इमिली घोष जी, आपने नृत्य की दुनिया में कदम रखने का फैसला क्यों किया?
जवाब: मैंने तीन साल की उम्र में नृत्य की दुनिया में कदम रखा था। कुछ साल बंगाल के चितरंजन में ही रहकर कत्थक की शिक्षा हासिल की। इसके बाद मैंने डॉ मालविका मिश्रा जी से कत्थक सीखना शुरू किया। दस साल की उम्र में मैं कोलकाता से चितरंजन अपडाउन किया करती थी। दो साल बाद यानी 1995 में मेरे पिताजी कोलकाता के पास शिफ्ट हो गए और यहां से मेरे करियर की शुरुआत हुई।
सवाल: स्निगधा दास जी, आप अपने बारे में कुछ बताईए? आपके करियर की शुरुआत कैसे हुई़?
जवाब: इमली जी की ही तरह मैं भी बंगाल के चितरंजन शहर में रहती थी और मेरे सफर की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। मैंने दूसरी कक्षा से ही शिक्षा लेना शुरू कर दिया था। पांचवीं कक्षा में पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन जाकर डांस का प्रशिक्षण हासिल किया। मेरी पूरी तालीम शांति निकेतन में ही हुई है। स्नातक के लिए मुझे दिल्ली स्थानांतरित होना पड़ा और मेरा स्वभाग्य रहा कि यहां मैंने भारतीय कला केंद्र में भरतनाट्यम की आगे की शिक्षा पूरी की।