शोविक चक्रव्रती और रिया चक्रवर्ती
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जिंदगी को वापस पटरी पर लाने में लगा वक्त
भाई-बहन ने बताया कि उस घटना के बाद जिंदगी को फिर से पटरी पर लाना एक लंबा और मुश्किल काम था। शोविक ने कहा कि इमोशनली और मेंटली स्थिर होने में उन्हें कई साल लग गए। उन्होंने कहा कि मुझे अभी भी PTSD है। कभी-कभी अचानक डोरबेल बजती है और मैं पुरानी यादों में खो जाता हूं। उस समय इतनी अफरातफरी थी कि हर डोरबेल पर ऐसा लगता था जैसे कोई हमारे पीछे आ रहा हो। आज भी कुछ पल उस दौर की यादें ताज़ा कर देते हैं।
ऐसे अनुभव से पूरी तरह से नहीं उबर पाते
रिया चक्रवर्ती ने उस अनुभव के मानसिक असर और यह कैसे उनके साथ बना हुआ है, इस पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा पूरी तरह से खत्म नहीं होता और इंसान के इमोशनल सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। यह ऐसी चीज नहीं है जिससे आप पूरी तरह उबर सकें। यह ट्रॉमा है।
अगर दिमाग में नहीं, तो शरीर में तो यह रहता ही है। ठीक होने के लिए लगातार कोशिश और सपोर्ट की जरूरत होती है। जैसा कि शोविक कह रहे थे, PTSD होता है। आप अपनी थेरेपी करवाते हैं और इसका सामना करते हैं। रिकवरी लगातार चलती रहती है।
रिया ने इस बारे में भी बात की कि कैसे उनका अनुभव लगातार लोगों की नजर में रहा, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई और उसे समझना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि भले ही बीता हुआ समय उनकी जिंदगी का हिस्सा बना हुआ है, फिर भी वो इमोशनल जख्मों के बावजूद आगे बढ़ रही हैं।
चेहरे फिल्म में रिया चक्रवर्ती और अमिताभ बच्चन
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