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इसलिए शूटर्स की फिल्म का नाम पड़ा 'सांड की आंख', तापसी और भूमि निभा रहीं अहम किरदार

Thu, 09 May 2019 11:23 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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परतापुर रेलवे स्टेशन पर फिल्म सांड की आंख शूटिंग - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया की सबसे बुजुर्ग शूटर्स चंदो तोमर और प्रकाशो तोमर पर बनी फिल्म सांड की आंख की शूटिंग पूरी हो चुकी है। फिल्म के सितारे अपने अगले प्रोजेक्ट्स की में लग गए हैं और फिल्म की प्रोडक्शन टीम जुट गई है इसकी रिलीज की तैयारियों में। अमर उजाला ने फिल्म के लीड कलाकारों और निर्देशक से जाना इस फिल्म की खासियत की बारे में।

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रिलायंस एंटरटेनमेंट की अगली फिल्म सांड की आंख के टाइटल को लेकर दर्शक काफी उत्सुक रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर फिल्म का ये नाम ही क्यों रखा गया? इस बारे में बात करने पर फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी कहते हैं, ‘सांड की आंख दरअसल अंग्रेजी के बुल्स आई से लिया गया। यह हमारी फिल्म पर बिल्कुल सटीक बैठता और चूंकि फिल्म है ही शूटिंग पर तो हिटिंग द बुल्स आई के हिसाब से इससे बेहतर टाइटिल हमारी फिल्म के लिए दूसरा नहीं मिल सकता। दूसरे सांड की आंख बोलने में भी बहुत कूल लगता है। फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ते समय इसके एक संवाद में हमें ये शब्द लिखे मिले और सबकी निगाहें बस यहीं अटक गई।’

फिल्म सांड की आंख पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो मशहूर महिला शूटर्स चंदो तोमर और प्रकाशो तोमर पर आधारित है। कम लोगों को ही पता होगा कि इस फिल्म के मेकर्स पहले ये फिल्म बुजुर्ग कलाकारों को लेकर ही बनाना चाह रहे थे। फिल्म में अपनी उम्र से दोगुनी महिला का किरदार कर रहीं तापसी पन्नू कहती हैं, ‘इन किरदारों की उम्र के कुछ कलाकारों से फिल्ममेकर्स की बात होने की जानकारी मुझे अब मिली है। लेकिन मैं दूसरी बात कहती हूं। मैं 30 साल की हूं और अक्सर स्कूल जाने वाली लड़कियों के किरदार करती हूं। 50 के करीब के तमाम कलाकार हैं तो कॉलेज के स्टूडेंट्स बन रहे हैं लेकिन तब सवाल नहीं उठते। तो अब जब हम अपने से अधिक उम्र के किरदार कर रहे हैं तो सवाल क्यों?’
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तापसी पन्नू भले उम्र को लेकर चली बात पर गुस्से में दिखीं हो लेकिन फिल्म की लीड हीरोइन भूमि पेडनेकर अपनी इस फिल्म में खूब मगन हैं। वह कहती हैं, ‘मुझे तो बहुत मजा आया ये किरदार करके क्योंकि ये किरदार ही इतना रोचक है। सांड की आंख मेरे लिए बहुत स्पेशल है। मैंने या तापसी ने अपनी से दूनी उम्र के किरदार कभी नहीं किए लेकिन ये कहानी इतनी प्रभावशाली है कि बाकी सारी बातें हाशिये पर चली गई हैं। हमारे ऊपर ये एक बड़ी जिम्मेदार थी और हम खुद को भाग्यशाली समझते हैं कि इन दो दादियों की कहानी हम इतने प्यार से शूट कर पाए।’

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